जिंदगी एक किताब….

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जिंदगी एक किताब
रिश्ते नातों के
कई टांको से
जुड़ती है जिंदगी
लिखे जाते हैं
कई सपने ,कई संवाद
कुछ सुनहरी सी स्याही से
कुछ सतरंगी से लिखकर
कुछ काली से
हर पन्ना जैसे
अलग ही गाथा लिए रहता है
बखान करता है
अपने दर्द को ,मर्म को
सुनहरी स्याही से लिखें
संवादों को
सम्मान के साथ
कहा जाता है जमाने में
सतरंगी स्याही से लिखे
अल्फाजों को
जी भर के
जिया जाता है अपनों के साथ
मुस्कुराहटों के साथ
किंतु काली स्याही के अक्षरों को
सफेद पन्नों पर लिखकर
छुपाया जाता है
पर्दा डालकर
शायद खुद से ही
खुद को छिपाने का
भ्रम पैदा किया जाता है
कुछ पन्नों को पढ़ा तो जाता है
लेकिन जीवन किताब में
शामिल नहीं किया जाता है
सीने के समंदर में
दफन किया जाता है
उन अनलिखें से
शब्दों को , संवादों को
और गाथाओं को
फिर एक सुंदर सी जिल्द से
सजा दिया जाता है
औरों को पढ़ने की खातिर
जिंदगी की किताब को।

स्मिता जैन

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।