फ़र्क

0 0
Read Time30 Second

सबके घर में चूल्हा जले
सबके घर हो खुशहाली
कोई खुशी से मनाए ईद
कोई खुशी से दीवाली
जातपात और धर्मभेद
यह अलगाव की बाते है
ईश्वर ने फ़र्क किया नही
फ़र्क गैर इंसानी बाते है
रक्त की कोई जाति नही
न ही धर्म का बंधन है
फ़र्क किस बात का प्यारे
यह जग ईश्वरीय उपवन है।
#श्रीगोपाल नारसन


matruadmin

Next Post

देश के हलात खराब है,क्या करोगे तुम देखकर

Tue Aug 18 , 2020
देश के हलात खराब है,क्या करोगे तुम देखकर | कुछ लोग देश बेच रहे है,रो पड़ोगे तुम देखकर || नाम नहीं लेता हूँ मै उसका,खुद ही समझ जाओगे | दुश्मन देश में शूटिंग होगी,अपने देश को छोड़कर || देश प्रेम है केवल दिखावा,मन में उसके कुछ और है| लोगो को […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।