
रोहिणी नक्षत्र की अष्टमी में
भगवान धरा पर आए थे
कारागार में जन्म लिया था
दुष्ट कंस भयभीत हुआ था
गोकुल में बाल लीलाए दिखाई
माखन चोरी की, डांट भी खाई
बांसुरी से अपनी सबको रिझाया
तारणहार का उसने फ़र्ज निभाया
मां देवकी का जांया था वह
यशोदा का दुलारा था वह
ग्वाले से द्वारकाधीश बना था
सोलहकला विश्वजीत बना था
जन्माष्टमी खुशी से मनाते है
पालने में कान्हा को झुलाते है।
#श्रीगोपाल नारसन

