बदल गये

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#शशांक दुबे

क़लम में धार वही है,पर जज़्बात बदल गये।
इतना सहा ज़माने को,हालात बदल गये।
लहज़ा वही है बातों का,अल्फ़ाज़ बदल गये।
मधुर है गीत उसी तरह,बस साज़ बदल गये।
कोई कहाँ रहा युगों तलक,तख्तोंताज़ बदल गये।
चंद टुकड़ों के ख़ातिर,मोहताज़ बदल गये।
कल कुछ और ही थे,तुम आज बदल गये।
जो बँटे थे दुःख आपस में,सब राज़ बदल गये।
अज़नबी से लगते हो,प्यार के सब अंदाज़ बदल गये।
एक हल्के झोंकें में ही,सरताज़ बदल गये।
मैं वही मैं हूँ,जो कल मैं था
इस “मैं” के कारण ही तुम आज बदल गये।
क़लम में धार वही है,पर जज़्बात बदल गये।
इतना सहा ज़माने को,हालात बदल गये।
#उपद्रवी
शशांक दुबे
छिंदवाड़ा

लेखक परिचय : शशांक दुबे पेशे से सहायक अभियंता (प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना), छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश में पदस्थ है| साथ ही विगत वर्षों से कविता लेखन में भी सक्रिय है |

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।