असलियत

2
rishabh
दुविधाओं से घिरा हुआ..
आंखों को मलता हुआ धीरे-धीरे जागता हुआ,
खुद को भारतीय करार करता हूँ…
अपने जीवन में एक मुद्दे पर दो राय रखता हूँ..l
जब मैं आदमी हूँ तो अपने घर की,
नारी को अबला एवं कल्पनाओं में सबला करार करता हूँ…
पिता हूँ तो अपने पुत्र के प्रतीक पर,
निरीह को बलि का पात्र करार करता हूँ…
नेता हूँ तो किसान की आत्महत्या पर,
उसे कायर एवं आंदोलन पर नौटंकी करार करार करता हूँ…l
विपक्ष में होता हूँ तो भटका युवा,
और सत्ता में आकर पत्थरबाज करार करता हूँ…
पार्टी को आजादी,अजान को शोर करार करता हूँ,
अपनी गलती को नादानी और,
दूसरे की गलती को गुनाह करार करता हूँ…
ऐसी ही कुछ अनकही बातों को,
भावनाओं का लिहाज करार करता हूँ…l
असलियत छिपाया हुआ हिन्दुस्तानी हूँ दोस्तों,
आज देश को `भारत`,कल से  `इंडिया` करार करता हूँ…l
                                                                              #ऋषभ एस.स्थापक
परिचय : छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश)निवासी ऋषभ एस. स्थापक विभिन्न विषयों पर शौक से कलम चलाते हैं। आप कलेक्टर कार्यालय के महिला एवं बाल विकास विभाग (छिंदवाड़ा)में कार्यरत हैं । 22वर्ष आपकी आयु है।

matruadmin

2 thoughts on “असलियत

  1. मैं भी आप की कविता पर दो राय रखता हू
    मैं लिखता तो उत्तम
    आप ने लिखी तो अति उत्तम

Comments are closed.

Next Post

संसद के दर पर सियासतदारी

Fri May 12 , 2017
भारतीय संसद इस बात का प्रमाण है कि,हमारी राजनीतिक व्यवस्था में जनता सबसे ऊपर है,जनमत सर्वोपरि है। भारत दुनिया का गुंजायमान,जीवंत और विशालतम लोकतंत्र है। यह मात्र राजनीतिक दर्शन ही नहीं है,बल्कि जीवन का एक ढंग और आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य है। भारत का संविधान पूर्ण रूप से कार्यात्मक […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।