
पहले से और बेहत्तर हो गया हूं
मै टूटकर अब पत्थर हो गया हूं।
नदियां खूद आती है मिलने मुझसे
मै खूद मे एक समंदर हो गया हूं।
इतनी चोट की वक्त और हालात ने
टुकडा था,अब खंजर हो गया हूं।
ये शानो सौकत बस दिखावे की है
मै अंदर ही अंदर खंडहर हो गया हूं।
जिंदगी कहां से आज कहां आ गई
झोका सा था अब बवंडर हो गया हूं।
संजय अश्क बालाघाटी

