मालवी जाजम : :चम् चम् करतो चुड़ीलो माथा पे बोर बंद ….मालवी जाजम इंदौर में बिछी

WhatsApp_Image_2019-07-28_at_5.23.38_PM

चम् चम् करतो चुड़ीलो माथा पे बोर बंद ….मालवी जाजम इंदौर में बिछी

सावन की फुआरो के साथ ही मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी में मालवी जाजम बिछी और शहर के मालवी साहित्यकारों का जमावड़ा लगा | बादलो की गडगडाहट के साथ ही चमकती बिजली मानो आतिशबाजी और प्रक्रति  का नजारा देखने लायक था | माह के अंतिम रविवार को बिछने वाली जाजम में मालवी गीत ,गजल और कविताओ का दौर चला | लोकगीत भी गाये गए |तेज बारिश में साहित्यकार गिले होते हुवे पहुचे और मालवी साहित्य के साथ सावनोत्सव मनाया गया | श्रृंगार की भी बात हुई तो ककड़ी भुट्टे की भी बात हुई | मस्ती की भी बात हुई |
वरिष्ठ मालवी साहित्यकार राजेश भंडारी “बाबू” ने चम चमातो चुड़ीलो  माथा पे बोर बंद, कमर से सरकतो कन्दोरो ,लहरातो बाजुबंद ……छम छम करता झंजरिया मुस्काए मकरंद …गोरी थारो रूप निहारे ..साजन मुस्काए मंद मंद | इसके अलावा दूसरी रचना वारे मालवा का लाल थारो कई केणो, थारो दिल मांगे मोरे ,कर्जो करी करी के गाड़ी ख़रीदे , माफ़ करने सारु मचाये शोर…सुना कर खूब वाह वाही बटोरी |साथ ही मालवी के वीणा पत्रिका में २ पेज रखने की भी बात साहित्यकारों ने की | साथ ही मालवी जाजम को वृहत रूप देने की भी बात की | मुकेश इन्दोरी ने लोकगीत – लो आइगयो सावन ,मन भई गयो स्वान सुनाकर खूब वाहवाही लुटी |श्री हरिमोहन नीमा ने मालवी हाइकु पड़े जो मालवी एक नया प्रयोग है |कुसुम मंडलोई ने गीत मै तो झुला झूलन को जाऊ सुनाया |भीम सिंह पवार ने सावन में ग्रामीण परिवेश का वर्णन किया कुवा बावड़ी सब भरी गया |नंदकिशोर चोहान ,सत्यानारायन मंगल और देवीलाल गुर्जर आदि ने भी रचनाये भी सुनाई और सभी को सराहा गया |
राजेश भंडारी 

matruadmin

Next Post

गुरु सेवा

Thu Aug 1 , 2019
गुरुदेव मेरे, गुरुदेव मेरे,  चरणों में अपने, हमको बैठा लो। सेवा में अपनी, हमको लगा लो, गुरुदेव मेरे, गुरुदेव मेरे। मुझको अपने भक्तो की,  दो सेवादारी। आयेंगे सत संघ सुनने ,  जो भी नर नारी। मैं उनका सत्कार करूँगा,  वंदन बारम्बार करूँगा।। गुरुदेव मेरे, गुरुदेव मेरे,  चरणों में अपने, हमको […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।