विपरीत समय, डगमगाता उद्देश्य

anudeep dwivwdi
टूट जाए जब कोई सपना तो
मजबुर मत होना,
दोष ना देना कभी ईश्वर का उनसे दूर मत होना,
राह चलती गाड़ी कभी भी अपना आपा खो सकती है,
मुश्किल तो मुश्किल है ये कभी भी हो सकती है,
जब मुझे तोड़ा सपनों के इरादो ने,
मै डूबा था अपनों के वादे में,
मै टूटकर गिर गया,
दिल कुछ और कहता हुआ दिमाग भी फिर गया,
जब टूटा तो बीच सागर में पड़ा था,
जब हाथ छूटा तो बीच गहराई में खड़ा था,
रोते रोते शाम हो गई कोई अपना ना आया,
रोज आते थे सपने उस दिन कोई सपना ना आया,
याद किया मैंने ईश्वर को तो पानी का बहाव रुक गया,
समुंदर डूबा खुद में और मेरे आगे झूक गया,
मैंने सोचकर बोला ये समुंदर अपने आप में गीला है,
उस दिन समझ आया ये सब प्रभु की लीला है,
मैंने अपना मुकाम खोया तो सब कुछ छूट गया,
जो बनाया ता सपना वो भी टूट गया,
मुझे ये तक नहीं मालूम था कि मै पाउगा क्या,
जब नौकरी नहीं होगी तो खाउगा क्या,
तब आत्मा बोली ये सब भ्रम तुम अभी तोड़ दो,
जब ना मालूम हो तुम्हे अपना लक्ष्य तो प्रभु पर छोड़ दो,
वो तो चाहता ही है कि तुम दिल से उसका हाथ थाम लो,
दिल में बसा लो उसकी तस्वीर और उसका नाम लो,
वो ईश्वर पिता बनकर तुम्हे भूखे नहीं सोने देगा,
तुम जब न्योछावर कर दोगे अपना कर्म तो कुछ गलत नहीं होने देगा,
जब पा ना पाना अपना लक्ष्य तो सबकुछ उस पर छोड़ देना,
फिर करना भरोसा उसपर और सारा भ्रम तोड़ देना,
देखना एक दिन तुम वहीं पहुंचोगे जाना तुम जाना चाहते हो,
मिल जाएगा तुम्हे वहीं सब जो तुम पाना चाहते हो,
जब देते है दोष हम अपनी नाकामी का ईश्वर को तो मनुष्य को अपना होश नहीं होता,
तुमने जो बनाए है कर्म अपनी क्रियाओं से ये वो है इसमें ईश्वर का कोई दोष नहीं होता।।।।।।

#अनु दीप द्विवेदी ‘अनु दीप’
उन्नाव(उत्तर प्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।