दोस्ती में साजिशें।

ajay ahsas

ऐ दोस्त तेरी दोस्ती में सब छुपाता आ गया
मेरे लिए दुश्वारियां परेशानियां साजिश किये
वो कुछ भी ना कर पायेगा मैं फिर बताता आ गया।
साजिश करे मैं जाउं फंस दुख हो उसे मुझे देख हस
वो चाहता है द्वन्द हो आंखों में कुहरे का धुन्ध हो
पर सत्य का सूरज तो कुहरे को मिटाता आ गया।
उसको गुमां है पैसे का है और अपने जैसे का
मंदिर में जोड़े हाथ वो ना दे गरीब का साथ वो
देख भिक्षुक हाथ जोड़े कि विधाता आ गया।
मुंह पे बोले ऐसा लगता है बड़ा हमदर्द वो
देकर भाषण जैसे नेता दूर करता दर्द वो
दूर से सुन बात उसकी खिलखिलाता आ गया।
कहता है कि हम तो चाहें आप भी आगे बढ़ो
हम पी एच डी कर रहे है आप भी ऐसे पढ़ो
मांगू तो ना दे किताबें और पढ़ाता आ गया।
मेरे मुंह पर मेरी वाली और उसकी तरफदारी
हवस अपनी मिटाने को ना देखता वो रिश्तेदारी
बनना अवसरवादी कैसे वो बताता आ गया।
दूसरे तो छोटे है वो पेट निकले मोटे हैं
उनका सिक्का खरा सोना बाकी तो सब खोटे है
उपब्धियां ट्रेनों बसों में वो गिनाता आ गया।
जब कोई मुश्किल हुई सुनकर मैं पहुंचा दौड़कर
सोचे करे बरबाद मुझको समय रहते तोड़़कर
था बुझाने का हुनर उसमें मगर आग फिर भी वो लगाता आ गया।
दोस्ती पर उसके मेरे दोस्त सब अफसोस कर
बैठे सड़़कों के किनारे अपने मन को कोस कर
देखकर आफत मेरी वो खिलखिलाता आ गया।
वो है कहता दूर हूं क्या आग घर की बुझाउंगा
नासमझ उसे नापता मैं सुन के दौड़ा आउंगा
अपना पराया वक्त ये हमको बताता आ गया।
दोस्ती का दोस्त मेरे क्या यही अन्जाम है
दोस्त बनकर हमको डसता हम पर ही इल्जाम है
जो हुआ अच्छा हुआ मैं गुनगुनाता आ गया।
कोई ना होता बुरा ये सब समय का खेल है
अब हुआ ‘एहसास’ की ये जिन्दगी की रेल है
बैर रक्खूं मैं न उससे सब भुलाता आ गया।
             -अजय एहसास
          सुलेमपुर परसावां
    अम्बेडकर नगर( उ०प्र०)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।