बिछड़ते रिश्ते

niraj tyagi
        रमेश की मां इन दिनों बहुत खुश है 55 साल की आयु में बेटे के यहाँ बच्चे होने की खुशी में रमेश की मां बहुत खुश है और धरती पर अपने पोते पोती के आने के इंतजार में अपनी खुशी सभी से बांट रही है।
        आखिर वह दिन भी आया जब उनके यहां पर एक पुत्री का जन्म हुआ। रमेश की मां बहुत खुश है।पोती के होते ही रमेश ने अपनी मां को वीडियो कॉल की क्योंकि रमेश अमेरिका में रह रहा है और उसकी मां यहां भारत में है।
        रमेश की मां अपनी पोती को गोदी में तो नहीं ले पाई लेकिन उसे इस बात की खुशी थी कि कम से कम वीडियो कॉलिंग के जरिए ही सही उसने उसका चेहरा देख लिया और अपनी पोती का चेहरा देखते ही रमेश की मां की आंखें खुशी से भर आई।
         काश वो उसे गोदी में भी ले पाती आज बहुत से मां-बाप अपने बच्चों को बाहर पढ़ने के लिए भेजते हैं या उनके बच्चे अपनी जॉब की वजह से विदेशों में रहने लगते है।फिर उनकी एक झलक केवल वीडियो कॉलिंग के जरिए पाते हैं और अपनी अगली पीढ़ियों का दर्शन वीडियो कॉलिंग से ही हो पाता है।
         कुछ सालों बाद जब वह अपने दादी बाबा से मिलने भी आते हैं और अगर दादी बाबा इंग्लिश में पढ़े लिखे ना हो यानी कि अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ना हो तो वो अपने पोते पोती की भाषा नहीं समझ पाते और वो बच्चे अपने दादी बाबा की भाषा नहीं समझ पाते क्योंकि उन बच्चो हिंदी भाषा का ज्ञान नही होता।
       आजकल विकास की दौड़ में और  भाषा की भिन्नता की वजह से रिश्ते भी एक दूसरे को समझने के काबिल नहीं रहे।ये मेरी सोच हो सकती है।हो सकता है मेरी सोच पुरानी हो लेकिन क्या ये विषय चिंतनीय नही है????
#नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश )

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।