वन और जीव

jaswant

विश्व पर्यावरण दिवस पर आओ वन और जीव को बचाने का संकल्प लें । मैं संकल्प लेता हूँ कि अपना जन्मदिन वृक्षारोपण करके मनाऊँगा और उनकी रक्षा करूँगा । और कभी जीव-जंतु को प्रताड़ित नहीं करूँगा ।।।।

मुझको लगते है प्यारे ,
वन्यजीव देखो हमारे ।
अब इनको बचाना है ,
बचेंगे तभी वन हमारे ।।

क्यों लगाते हो आग वन में ,
क्यों पहुँचाते हो नुकसान ।
पर्यावरण सरंक्षण के लिए ,
बनाओ इनको भी अभियान ।।

लुप्त हो रही है प्रजातियां ,
सब अपने मोह और लालच में ।
समय रहते सम्भल जाओ ,
एक जीव नहीं बचेगा कानन में ।।

कभी नहीं करेंगे वार ,
जीव-जन्तुओं से करो प्यार ।
मनुष्य और जीव-जंतु का साथ ,
फिर हो जायेगा धरती का सुधार ।।

जीव-जंतुओ को बचाने का ,
एक ऐसा अभियान चलाएंगे ।
इन प्यारे वन्यजीवों पर ,
हम सब मिलकर दया दिखाएंगे ।।

धरती पर हो रहे प्रदूषण को ,
धीरे-धीरे खत्म करेंगे ।
पर्यावरण सरंक्षण होगा और ,
वन्यजीव विचरण करेंगे ।।

अगर इन्हें बचाना है तो ,
पेड़-पौधों को मत काटो ।
जंगल में रहने दो इनको ,
इनके घर को मत बाँटो ।।

आओ सब मिल प्रण ले ,
करें वन और जीव की रक्षा ।
देखना इसी से हो जाएगी ,
हमारी प्यारी धरती की सुरक्षा ।।

वन और जीव को बचाना है तो ,
प्रदूषण को जड़ से मिटाओ ।
करे विनती “जसवंत” सबसे ,
दो-दो पेड़ सब जन लगाओ ।।
दो-दो पेड़ सब जन लगाओ ।।।।

नाम – जसवंत लाल बोलीवाल ( खटीक )

पिताजी का नाम – श्री लालूराम जी खटीक ( व.अ.)

माता जी का नाम – श्रीमती मांगी देवी

धर्मपत्नी – पूजा कुमारी खटीक ( अध्यापिका )

शिक्षा – B.tech in Computer Science

व्यवसाय – मातेश्वरी किराणा स्टोर , रतना का गुड़ा

राजसमन्द ( राज .)

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।