कन्यादान

mukesh sing
तू जिगर का टुकड़ा है मेरा,
कैसे तुझसे मैं अंजान बनूं।
तू वस्तु नहीं जान है मेरी,
भला कैसे मैं तेरा दान करूं ?
तुझसे महकता है मेरा घर-आंगन,
तुम्हीं से है मेरा यह जीवन।
मेरे जीवन का आधार,मेरा प्राण है तू,
भला कैसे मैं तेरा दान करूं ?
बस विदा करता हूं मैं तुझे नए घर को,
तू जा के उस घर को भी अब स्वर्ग बना।
पर तू न गुपचुप कोई दर्द सहना,
न खुद को अकेली-असहाय समझना।
मेरे लिए तो प्रभु का वरदान है तू,
भला कैसे मैं तेरा दान करूं ?
ससुराल में लगना पुष्प बन के महकने,
पर आती रहना मेरी बगिया में चहकने।
यहां अपने हैं सब तेरे,
रहती है तू सबके दिलों में।
तो भला एक पल में,
कैसे मैं तुझे पराया कर दूं ?
न कोई अनचाही चीज है तू,
न इस बाप पे कोई बोझ है तू।
मेरी दुनिया मेरा जहां है तू,
तुझे न मैं खुद से बेगाना करूं।
बांधता हूं तुझे एक नए बंधन में,
पर मैं न कभी तेरा दान करूं।
कर दूं जो दान तू हो जाएगी पराई,
किस अभागे ने है ये रीत बनाई?
तू है मेरे जीवन भर की कमाई,
फिर कैसे मैं तुम्हारा दान करूं ?
                                                                      # मुकेश सिंह
परिचय: अपनी पसंद को लेखनी बनाने वाले मुकेश सिंह असम के सिलापथार में बसे हुए हैंl आपका जन्म १९८८ में हुआ हैl 
शिक्षा स्नातक(राजनीति विज्ञान) है और अब तक  विभिन्न राष्ट्रीय-प्रादेशिक पत्र-पत्रिकाओं में अस्सी से अधिक कविताएं व अनेक लेख प्रकाशित हुए हैंl तीन  ई-बुक्स भी प्रकाशित हुई हैं। आप अलग-अलग मुद्दों पर कलम चलाते रहते हैंl 

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।