खोखले रिश्ते

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pragya pandey
पिंकी के फोन की घंटी बजती है
पिंकी “हेलो कौन”
उधर से आवाज आती है “मैं रेनू कैसी हो पिंकी”
पिंकी खुशी से झूम उठती है “अरे रेनू तुम कहाँ हो? तुम्हारा नंबर भी नहीं लगता,शादी के बाद से तो तुम्हारी कोई खबर ही नहीं है। भूल गई क्या अपनी बचपन की सहेली को”
रेनू “नहीं मैं भूली नहीं बस तुम्हारे जीजा को पसंद नहीं है कि मैं किसी से बात करूं या सोशल मीडिया पर रहूँ।बस इसी लिए।
पिंकी “तो मिलने ही आ जाती”
रेनू “नहीं यार उनको पसंद नहीं है कि मैं कहीं भी जाऊँ, मैं मायके भी बहुत कम ही जा पाती हूंँ। आज मायके आई तो सोचा तुमसे बात कर लूं”
पिंकी “आखिर जीजा ऐसा क्यों करते हैं”
रेनू “मुझसे बहुत प्रेम करते हैं, मेरे बिना रह नहीं पाते”
पिंकी रेनू की यह बात सुनकर चुप हो जाती है। मन में सोचती है यह प्रेम है या मात्र पुरुषत्व की वेड़ियों में जकड़ा एक #खोखला_रिश्ता, जो धीरे-धीरे रेनू के अस्तित्व को ही खत्म कर देगा।
पिंकी रेनू को समझाने की बहुत कोशिश करती है लेकिन वह मानने को तैयार ही नहीं कि वह एकमात्र खोखले रिश्ते में बंधी है किसी प्रेम के रिश्ते में नहीं।
नाम-प्रज्ञा पाण्डेय
साहित्यिक उपनाम-प्रज्ञा पाण्डेय
वर्तमान पता-उन्नाव, उत्तर प्रदेश
राज्य-उत्तर प्रदेश
शहर-उन्नाव
शिक्षा-डबल एम ए (अंग्रेजी साहित्य व इतिहास)
कार्यक्षेत्र-ग्रहणी
विधा -कविता, मुक्तक, ग़ज़ल

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।