खोखले रिश्ते

pragya pandey
पिंकी के फोन की घंटी बजती है
पिंकी “हेलो कौन”
उधर से आवाज आती है “मैं रेनू कैसी हो पिंकी”
पिंकी खुशी से झूम उठती है “अरे रेनू तुम कहाँ हो? तुम्हारा नंबर भी नहीं लगता,शादी के बाद से तो तुम्हारी कोई खबर ही नहीं है। भूल गई क्या अपनी बचपन की सहेली को”
रेनू “नहीं मैं भूली नहीं बस तुम्हारे जीजा को पसंद नहीं है कि मैं किसी से बात करूं या सोशल मीडिया पर रहूँ।बस इसी लिए।
पिंकी “तो मिलने ही आ जाती”
रेनू “नहीं यार उनको पसंद नहीं है कि मैं कहीं भी जाऊँ, मैं मायके भी बहुत कम ही जा पाती हूंँ। आज मायके आई तो सोचा तुमसे बात कर लूं”
पिंकी “आखिर जीजा ऐसा क्यों करते हैं”
रेनू “मुझसे बहुत प्रेम करते हैं, मेरे बिना रह नहीं पाते”
पिंकी रेनू की यह बात सुनकर चुप हो जाती है। मन में सोचती है यह प्रेम है या मात्र पुरुषत्व की वेड़ियों में जकड़ा एक #खोखला_रिश्ता, जो धीरे-धीरे रेनू के अस्तित्व को ही खत्म कर देगा।
पिंकी रेनू को समझाने की बहुत कोशिश करती है लेकिन वह मानने को तैयार ही नहीं कि वह एकमात्र खोखले रिश्ते में बंधी है किसी प्रेम के रिश्ते में नहीं।
नाम-प्रज्ञा पाण्डेय
साहित्यिक उपनाम-प्रज्ञा पाण्डेय
वर्तमान पता-उन्नाव, उत्तर प्रदेश
राज्य-उत्तर प्रदेश
शहर-उन्नाव
शिक्षा-डबल एम ए (अंग्रेजी साहित्य व इतिहास)
कार्यक्षेत्र-ग्रहणी
विधा -कविता, मुक्तक, ग़ज़ल

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