शोक गीत

om prakash sargara
जा बिटिया जा तुझे विदाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
अरमां थे पहली छिब तेरी
निरखूँगा दुलार करूंगा
तुझे गोद मे खेल खिलाता
मेरा घर गुलजार करूंगा ।।
सुप्त इच्छाएं आन जगाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
दादा-दादी,नाना-नानी
मामा-मामी,चाचा-ताई।
सब तुझको ही तॉक रहे थे
अगल बगल सब झॉक रहे थे ।।
आई सबको देख रूलाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
एक पाँव पर खड़े सभी थे
अंगद बनकर अड़े सभी थे
डॉक्टर से हाथाजोड़ी की
ईश्वर से भी लड़े सभी थे।।
तुमने हमसे करी ठगाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
तुम होती तो हंसता बचपन
खिलते पल्लव,गाते-मंगल ।
गली-मौहल्ले बॉट पताशे
नाईन माई करती चुहल ।।
खूब निभाई सगी-सगाई।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
दिव्य आत्मा बनकर आई
दो मिनट की खुशियॉ लाई।
परम तत्व मे मिली यकायक
ऐसी भी थी क्या रूसवाई ।।
देखी तेरी आज रूसाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
पता चला था पिता बना हूं
माता पीड़ा मुक्त हुई थी ।
संदेशो के पंख लगे तब
शुभकामना ढेरों पाई  ।।
दर्दनाक थी दगा-दगाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
माता की ममता बिसराई
वज्र गिरा मुझ पे दुखदाई ।
दिव्या तुझको नाम दिया है
तुझे विदाई, तुझे विदाई ।।
जा बिटिया जा तुझे विदाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
जहां रहो उजियारा करना
रहो कहीं भी पर ना डरना ।
याद कभी जो आ जाए तो
कदम मेरे घर फिर से धरना  ।।
कर्ज तुम्हारा यहॉ बकाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
फिर आने की तुम्हे बुलाई ।
जा बिटिया जा तुझे विदाई ।।

-*

जा बिटिया जा तुझे विदाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
अरमां थे पहली छिब तेरी
निरखूँगा दुलार करूंगा
तुझे गोद मे खेल खिलाता
मेरा घर गुलजार करूंगा ।।
सुप्त इच्छाएं आन जगाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
दादा-दादी,नाना-नानी
मामा-मामी,चाचा-ताई।
सब तुझको ही तॉक रहे थे
अगल बगल सब झॉक रहे थे ।।
आई सबको देख रूलाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
एक पाँव पर खड़े सभी थे
अंगद बनकर अड़े सभी थे
डॉक्टर से हाथाजोड़ी की
ईश्वर से भी लड़े सभी थे।।
तुमने हमसे करी ठगाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
तुम होती तो हंसता बचपन
खिलते पल्लव,गाते-मंगल ।
गली-मौहल्ले बॉट पताशे
नाईन माई करती चुहल ।।
खूब निभाई सगी-सगाई।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
दिव्य आत्मा बनकर आई
दो मिनट की खुशियॉ लाई।
परम तत्व मे मिली यकायक
ऐसी भी थी क्या रूसवाई ।।
देखी तेरी आज रूसाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
पता चला था पिता बना हूं
माता पीड़ा मुक्त हुई थी ।
संदेशो के पंख लगे तब
शुभकामना ढेरों पाई  ।।
दर्दनाक थी दगा-दगाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
माता की ममता बिसराई
वज्र गिरा मुझ पे दुखदाई ।
दिव्या तुझको नाम दिया है
तुझे विदाई, तुझे विदाई ।।
जा बिटिया जा तुझे विदाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
जहां रहो उजियारा करना
रहो कहीं भी पर ना डरना ।
याद कभी जो आ जाए तो
कदम मेरे घर फिर से धरना  ।।
कर्ज तुम्हारा यहॉ बकाई ।
दर्श दिखाकर अगन लगाई ।।
फिर आने की तुम्हे बुलाई ।
जा बिटिया जा तुझे विदाई ।।
#नाम- ओम प्रकाश सरगरा
साहित्यिक उपनाम- ओम अंकुर
वर्तमान पता- भीलवाड़ा राजस्थान
शिक्षा- शास्त्री , शिक्षा शास्त्री ,आचार्य , संस्कृत साहित्य
कार्यक्षेत्र- शिक्षा विभाग के साथ शैक्षिक नवाचारो पर अकादमिक ,तकनीकी समर्थन
विधा -गद्य ,पद्य ,चम्पू (गीत , कविताएं ,कहानियां ,लेख ,मुक्तक आदि )
प्रकाशन-थार सप्तक ,बिणजारो ,जागती जोत ,कथेसर ,साहित्यांचल आदि ।
सम्मान- 1.विशिष्ट साहित्यकार -सम्मान 2005 राजस्थान पाठक पीठ जयपुर 
2.अम्बेकर सेवा पुरस्कार ,दलित साहित्य अकादमी हरियाणा 
3.युवा कवि पुरस्कार ,भारत विकास परिषद बिजयनगर अजमेर 
ब्लॉग- सृजनांकुर ,कवि ओम अंकुर 
अन्य उपलब्धियाँ- आकाशवाणी जयपुर तथा दूरदर्शन जयपुर से पिछले 15 वर्षो से समय -समय पर आमंत्रण पर कविता पाठ ।
लेखन का उद्देश्य- शिक्षा ओर साहित्य को आम जन तक पहुंचाना तथा लोगो के दर्द का मरहम बनना ।
एक मौलिक रचना-शीर्षक *”- जा बिटियॉ जा तुझे विदाई “*

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भावना

Sat Apr 27 , 2019
है ऐसी मेरी भावना, बन सकूं वीरांगना। कलुषता निकाल दूं, नेक करूँ कामना।। घात बात छोड़कर, कू रिवाज तोड़कर। धीर अपना बांध के , नेक धरूँ धारणा।। सत्य कर्म सीखकर, लाज शर्म सींचकर। प्रेम भाव पर मरूं, है यही अराधना।। देश शान पर मरूँ, मैं नाम देश का करूं । […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।