पृथ्वी दिवस 

meena kumari solanki
22 अप्रैल का दिन प्रतिवर्ष पृथ्वी दिवस के रुप में मनाया जाता है .
    वास्तव में पृथ्वी दिवस साल में दो बार मनाया जाता है .
       21 मार्च को यह दिन उतरी गोलार्ध के वसंत तथा दक्षिणी गोला्ध के पतझड़ के प्रतीक सवरूप मनाया जाता है . वैज्ञानिक और पर्यावरणीय रुप में उसका अधिक महत्व है .  संयुक्त राष्ट्र का समर्थन प्राप्त कर इसे अंतर्राष्ट्रय दिवस के रुप में मनाया जाता है .
        दूसरे सन् 1970 में पर्यावरण की शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन द्वारा इस की स्थापना की गई थी .  अमेरीका में इसे वृक्ष दिवस के रुप में मनाया जाता है.
इन दोनों ही दिवस का मुख्य  उद्देश्य लगभग समान है . इन दोनों को  ही पृथ्वी का संरक्षण करने के लिए तथा इसे संबंधित जानकारी प्राप्त करने तथा प्रधान करने के लिए मनाया जाता है जो कि मानव जीवन के लिए अति आवश्यक हैं क्योंकि पृथ्वी ही एक मात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है इसकी सूर्य से दूरी 14 करोड़ 95 लाख किलोमीटर है .पृथ्वी का व्यास 6371 किलोमीटर है .
        पर्यावरण अर्थात “चारों ओर से घिरा हुआ “.  पृथ्वी और पर्यावरण का गहरा संबंध है पृथ्वी पर पर्यावरण हमें ढके हुए है तथा हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित करता है.
        प्राकृतिक पर्यावरण के मध्य स्वास्थ्य एवं अनुकूल सामंजस्य का अध्ययन किया जा सकता है.   पयार्वरण के अंतर्गत आनेवाले वाले विषय हैं स्थल मंडल, वायुमंडल ,जलमंडल ,जैव मंडल आदि .
       स्थल मंडल के अंतर्गत पृथ्वी की रचना उसकीविभिन्न आकृतियां, मिट्टी व चट्टाने विभिन्न व्यक्तियों द्वारा पृथ्वी तल पर किए जाने वाले परिवर्तन , नदी ,हिमनदी, वायु ,भूमिगत जल ,ऊर्जा तथा मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को सर्कल किया जाता है.
       वायुमंडल की बनावट जलवायु तथा इसके तत्व तापमान ,सूर्य ताप ,वायुदाब की विभिन्न प्रकार की पवने, बादल ,जल ,पृथ्वी का तीसरा प्रमुख क्षेत्र है .  जिसमें नदियों ,सागरों ,महासागरों, खाड़ियों महासागरों के जल में तापमान तथा लवणता की मात्रा, महासागरों के जल की गतियों जैसे लहरें धाराएं वह ज्वार भाटा आदि.  तथा जैव मंडल के अंतर्गत वनस्पति विश्लेषण, उनकी विशेषताएं जल जीव-जंतु तथा मनुष्य जलवायु से वनस्पति तथा जीव आदि आते हैंपृथ्वी का ओसत तापमान हर वर्ष बढ़ रहा है .  इसके पीछे का कारण बढ़ता हुआ औधोगिकरण है .  यदि हम भारत की बात करें तो फैक्ट्रियों से हर रोज 6 अरब किलोग्राम कूड़ा समुंद्र में डाला जा रहा है .  भारतवर्ष हर साल प्रदूषण की वजह से दो लाख करोड रुपए का नुकसान झेल रहा है .  मुंबई जैसे महानगर में सांस लेना सौ सिगरेट पीने के बराबर है.यही कारण है कि वर्तमान में पृथ्वी दिवस को एक पर्व के रूप में दुनिया भर में बनाया जाने लगा है .   यह हर एक साल एक अरब से अधिक लोगों के द्वारा मनाया जाता है और एक दिन के दिनचर्या को पर्यावरण के कार्य के लिए समर्पित किया जाता है ।
परिचय-
नाम ___डॉ मीना कुमारी सोलंकी
जन्म स्थान ___नीमली ,चरखी दादरी, हरियाणा 
पिता ___सूबेदार शीशराम 
माता ___श्रीमती फूलवती टेलरणी
 योग्यता ___एम ए ,एमफिल ,पीएचडी हिंदी ,एम ए एजुकेशन ,जेबीटी ,बीएड , टैट ,स्क्रीनिगं आदि
व्यवसाय ___अध्ययन, अध्यापन 
रुचि ____नृत्य ,गायन, अभिनय, वादन ,डीबेट करना आदि
 विशेष __स्थानीय, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पत्र पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन तथा कवि सम्मेलन एवं सेमिनारों में सहभागिता।
पत्राचार__  डॉ मीना कुमारी  c/o देईचंद सांगी
 गांव व डाकखाना –सांखोल 
तहसील -बहादुरगढ़ 
जिला -झज्जर (हरियाणा )

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।