मेरी शायरी मे यार मुहब्बत न ढूंढ
हुस्न और इश्क़ की लज़्ज़त न ढूंढ ।
महरूम हैं मेरे शेर जलवाए महबूब से
ज़िक्र तू यहाँ हसिनाए खूबसूरत न ढूंढ।
मत कर नेताओं के वादों पर भरोसा
सहरा में यार समंदर की फितरत न ढूंढ ।
रहने दे मासूमों की मासूमियत महफ़ूज
इनकी आँखों में अभी से नफरत न ढूंढ ।
फ़िर न होगी अजय मुझसे ज़ुर्मे मुहब्बत
कहे दिल मुझसे कोई ऐसी ज़ूर्रत न ढूंढ ।
#अजय प्रसाद
नालंदा(बिहार )
Mon Apr 22 , 2019
शांतचित एक गहना है हमे इसी रूप में रहना है व्यर्थ की बातों से दूर रहो ईश्वरीय याद में खोये रहो चिंता पास नही आयेगी चेहरे पर मुस्कान छायेगी स्वस्थ भी अनुकूल होगा मन मे ईश्वरीय जुनून होगा जीवन की खुशियां पास होगी हर आस विश्वास होगी सदपरिवर्तन इसी से […]