एक सती वृंदा से छल किया,
तो भगवान को भी पत्थर बनना पड़ा।
आज का इंसान,क्यों नहीं
समझ पाता इतनी सी बात को।
पत्थर दिल इंसान,
पत्थर बनने से न डरे,
पर,खुद भी तो पत्थर न बने॥
#अरविंद ताम्रकार ‘सपना’
परिचय : श्रीमति अरविंद ताम्रकार ‘सपना’ की शिक्षा एमए(हिन्दी साहित्य)है।आपकी रुचि लेखन और छोटे बच्चों को पढ़ाने के साथ ही जरुरतमंद की सामर्थ्यानुसार मदद करने में है।आप अपने रचित भजन खुद गाकर व लेखन द्वारा अपने मनोभावों को चित्रित करती हैं। सिवनी(म.प्र.)के समता नगर में आप रहती हैं।
Tue Oct 31 , 2017
वृद्धाआश्रम में रहकर भी, माँ संतान सप्तमी रहती है। हो जाए न बच्चे का अनिष्ट, यही सोच प्रभु को भजती है॥ दुनिया का उसे कोई मोह नहीं, पर उससे वो मोह करती है। आशा का दीप जलाकर, देहरी पर बैठा करती है॥ उसकी गलतियों पर भी, वो किस्मत को दोष […]
बहुत बढ़िया “सपना” जी