
दिल से जुदा नहीं हो तुम,
मेरे ज़ेहन में तेरी यादें हैं ।
अधूरी हैं रस्में मोहब्बत की,
पतझड़ से ये तेरे वादे हैं ।।
हर सांस मुझे तेरा इंतज़ार है,
सच कहूं मुझे तुझसे प्यार है ।।
अहसास ए इश्क सुखन देता है,
विसाल ए यार तो चुभन देता है।
तेरे बिन तो ज़िन्दगी बेकार है,
सच कहूं मुझे तुझसे प्यार है ।।
आशिकों से ही इश्क ज़िंदा है,
मिसालें उनकी दी जाती हैं ।।
मोहब्बत में कंजूसी नहीं होती,
ये तो ख़ुले दिल से की जाती है।
तेरे बिन कहां दिल को करार है,
सच कहूं मुझे तुझसे प्यार है ।।
#डॉ.वासीफ काजी
परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत डॉ. वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,साथ ही आपकी हिंदी काव्य एवं कहानी की वर्त्तमान सिनेमा में प्रासंगिकता विषय में शोध कार्य (पी.एच.डी.) पूर्ण किया है | और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए कियाहुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।
Sun Apr 21 , 2019
ढूंढने से भी नही मिली आज मैं, खुद ही खुद में मुझे! खो दिया है खुद को देखो, क्यो इतना मैंने चाहा तुझे!! रब्ब जाने कितने अरसे अब, मुस्कुराए मुझको हो गए! मेरा नाम मेरा अस्तित्व देखो, सब तो तुझमें खो गए!! बोललू अगर मैं किसी से, तू उंगली मुझ […]