आँसू

babulal sharma
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ये नेत्र मनुज के जन्मों से,
सुखः दुःख दरश् पिपासू है।
नयन सेज संचय से बहता,
यह सीकर झरना आँसू है।

मन के पावनतम भावो का,
रस कल्पासव ही आँसू है।
खुशियाँ,गम दोनों ले आते,
बरबस जिज्ञासू आँसू है।
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उभय वर्गीय जीवन  इनका,
यौवन जीवन है कुछ पल का।
किसी नैन मोती से चमके
होते झरना आतपजल का।

वीर शहादत पर आते हैं,
सात समन्दर जितने आँसू।
अकथ कहानी बने हुए जो,
सुन्दर विहग मोर के आँसू।
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राष्ट्र सृजन में प्राण गँवाये,
उन्हे नमन् आँसू से करते।
धरा-पूत गर्दिश मे हो तब,
मन वंदन आँसू  से करते।

मनमीत मिले खुशियां झूमें,
मिलन के आँसू राधे श्याम।
बिछुड़न तिक्तसजा है मनकी,
विरह  के आँसू  सीता राम।
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करें विदाई जब बेटी की,
वज्र पिता के आँसू  झरते।
बेटे घर से करे पलायन,
मातु के अश्क कभी न थमते।

मात पिता के इंतकाल में,
संतानों  के अश्क छलकते।
संतानो  के अंत दर्श फिर,
पितर अश्क कभी न थकते।
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वृद्धाश्रम में  जाकर देखे,
वे सब मन के अश्क पिरोते।
अनाथ घरों मे जाके देखें,
कई  समन्दर  आँसू रोते।

दीन हीन दिव्यांगजनों के,
नयन अश्क धरोहर रहते।
सत्जन धीर वीर सतसंगी,
दिव्य अश्रु  सहेजे  रखते।
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नयन अश्रु खारा जल होते,
सिन्धु बिन्दु,गंगाजल स्रोते।
दुख में अश्रु् स्वातिबिन्दु से,
सुखमय अश्रु सहज ही होते।

शिशु के अश्रु सरलतम् होते,
पाषाणों भर वत्सल  देते।
पुरुष  अश्रु पाषाणी होते,
जनमानस वीभत्सक लगते।
💧👁👁
नारी दृग आँसू के सागर,
पल में भरते करुणा गागर।
मिलन जुदाई दोउ भावना,
बहते रुकते करुणा पाकर।

राधा रानी गोपी सखियाँ,
कृष्ण की प्रेम दीवानी थी।
मीरा सबके अश्रु पी गई,
राधा  दरश् दीवानी थी।
💧👁👁
सिय के आँसू पावन अमरित,
धरती माँ  के गोद समाए।
प्रायश्चित श्री राम के आँसू,
मर्यादा  के नाम गमाए।

प्रेमी  जोड़े   लैला  मँजनू ,
कितने रोये,अश्क बह गये।
वै,अँसुवन के प्रबलखार से,
सातों  सागर  खार हो गये।
💧👁👁

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।