मेहनत से मंजिल

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जब कभी भी उठने की कोशिश की
तब तब गिराने बालों ने बहुत
मन्नते की।
कि काश,
यह कभी न उठे।
पर उठने की,
जो मन में ठाने थे।
बे उठे
बहुत उठे
इतने ऊँचे उठे
कि गिराने वालो की सारी कोशिसे
नाकामयाब हो गयी।।
वे बढे
बहुत आंगे बढे
इतने आंगे बढे
कि उनका साथ पाने को
किसी के हौसले भी नही हुए।
वे चले
बहुत चले
इतना चले
कि उन्हें रोकने वालों के
इरादे बहुत फीके रह गए।
उन्हें मंजिल मिली
सब देखते रह गए।
उनने जो ठाना था
वे वो सब कर गए।
गिराने वाले बहुत नीचे
गिर गये।
इतने नीचे गिर गए
इतने नीचे गिर गए
कि उठने
उठकर चलने
चलकर बढ़ने
के सारे ख्वाब
उन्हें एक सपने से रह गए।
और
अब बो लोग बहुत
बहुत
बहुत पीछे रह गए।
अधूरे रह गए।
अधूरे रह गए।
इसलिये सम्बल बनो
सहारा बनो
बढ़ने में सभी के।
क्योकि मजा नही है बिल्कुल
गिराने में किसी के।
उठने दो सारी दुनियां को
बढ़ने दो सारी दुनियां को
यही विचार उन्नति है
हमारी
हम सबकी।
कमजोर न रह
हताश न हो।
प्रयत्न कर
मजबूर न हो।
मंजिल मिलेगी
आज नही तो कल
प्रयत्न कर
बस उदास न हों।
हँस दिल खोलकर अपना
बढ़ मन खोलकर अपना।
लग जा मंजिल की तरफ
रस्ते बनाने
तो जरूर मिलेगी बो
इसी मेहनत लगन के बहाने।
        #शास्त्री दीपक जैन”ध्रुव”

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मन की चाह

Mon Apr 8 , 2019
मैं धरती का दीप बनूंगा, दूर करूँगा अँधियारा। साक्षरता रूपी लहर चलाकर, शिक्षित करूँगा जग सारा। मैं धरती का पुष्प बनूंगा, पावन सुगंध फैलाऊगा। काँटे सारे स्वयं लेकर मैं, कोमल छाँव बिछाऊँगा। मैं धरती का खग बनूँगा, सदभावना फैलाऊँगा। समृद्धि गरिमा प्रतीक बनकर, झंडा ऊँचा उठाऊँगा। मैं धरती का कृषक […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।