सैनिक सीमा का

vandana sharma
वो जब सीमा पर होता है***
तो जननी के दूध की
   हर एक बूंद
  उसे फर्ज और कर्ज की
याद दिलाती है
वो जब घिर जाता है
   दुश्मन टोली से
  माँ का भीगा आँचल
 फौलाद की ढाल बन बचाता है
वो जब सीमा पर होता है***
बहन की राखी
      प्रेरित करती है
    सुरक्षा वचन निभाने को
वो जब लहूलुहान हो जाता है
      तो उस राखी का
   हर एक सूत्र
    मरहमपट्टी बन पीड़ा को
              सहलाता है
वो जब युद्धक्षेत्र में
       दुश्मन से घिरकर टूटकर
      बिखरने लगता है
        तो भाई की सुदृढ़ बाजू
      थाम लेती है उसका हाथ
पिता का मनोबल
     उसे गिरने नहीं देता
     बचपन के लड़खड़ाते
   कदमों को अंगुली के
      विश्वास से चलाता है
वो जब सीमा पर होता है***
और बदबूदार सीलन भरी
    खाइयों में
       घुटने लगता है उसका दम
   तो प्रिया का स्पर्श
         महका देता है उसे
      प्रेयसी की वेदना
     सोख लेती है सारी नमी
अपने नवजात बच्चे को
       देखने की प्यास
         मिटा देती है कई दिनों की
     भूख और तृषा की पीड़ा
वो जब सीमा पर होता है****
वो सैनिक अकेला कहाँ लड़ता है
     सीमा पर
      ना ही अकेला मरता है
    उसके साथ लड़ते हैं
           उसके सारे रिश्ते
       शहीद होता है
       उसका पूरा परिवार।
#वन्दना शर्मा
अजमेर(राजस्थान)
मेरा नाम वन्दना शर्मा है मैं अजमेर से हूँ मेरा जन्म स्थान गंडाला अलवर है मेरी शिक्षा हिंदी में स्नातकोत्तर बी एड है मेरे आदर्श मेरे गुरु और माता पिता हैंलेखन और पठन पाठन में मेरी रुचि है नौकरी के लिए प्रयास रत हूँ। मेरी रचनाएँ  कई पोर्टल पर प्रकाशित होती हैं मैं कई  काव्य समूहों में सक्रिय हूँ । अभी मैं मातृभाषा पोर्टल से जुड़ना चाहती हूँ पोर्टल के नियमों के प्रति प्रतिबद्धता मेरी प्रतिज्ञा है वन्दन 

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