पलाश

0 0
Read Time40 Second
devyani nayak
तुम सूखे ठूंठ से रहते
                         फिर भी देते फूल महकते
टेसू कनक कमलासन पर्णी
                           जाने कई तुम नामों से
जाने जाते केशरिया रंग लिये
                             कान्हा के दरबार में जाते
बन जाते जब रंग ये पक्के
                              नहीं छोड़ते ग्वाल बाल गोपियों से
रास लीला कर नचवा लेते
                              भिगो कर रख देते भक्ति में
रंगों की बौछारों से
                              धन्य वो फूल पलाश के
कान्हा संग राधिका जिससे
                                मतवाली होली खेलें ।
#देवयानी नायक,
झाबुआ(मध्यप्रदेश)

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

होली का त्यौहार

Wed Mar 20 , 2019
होली का त्यौहार है आया, खुशी हजारों रंगों में। प्यार से होली खेलेंगे ना, शामिल होना दंगो में। मदिरा सेवन करें नही हम,सादा खाना खाना है। द्वेष बैर ना दिल मे अपने,सबको गले लगाना है।। प्रेम के हम पैगामी हमको,पड़ना ना भई पंगो में। प्यार से होली खेलेंगे ना,,,,,,,,,,,,, घर […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।