भारत, भारतीय भाषाओं और भारतीयता के लिए मंथन का आव्हान

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्रीय राष्ट्र है। देश के ९० करोड़ मतदाता ११ अप्रैल से १९ मई के बीच लोकसभा की ५४३ सीटों के
लिए मतदान करेंगे। जेल ५४३ सदस्य विजयी होंगे, उनसे और उनके दलों से ९० करोड़ मतदाताओं की स्पष्ट, नैतिक और लोकतंत्र को पुष्ट करने की दृष्टि से राष्ट्र हितैषी अपील/आग्रह और अपेक्षा है;
१. १९५२ से देश का सर्वोच्च अधिकार सम्पन्न लोकतंत्र का पावन मंदिर लोकसभा है।
२. लोकसभा चुनाव में सभी दलों की ओर से तथा उम्मीदवार भी मतदाताओं की भाषा में बोलकर वोट माँगते हैं। विदेशी भाषा अंग्रेज़ी में बोलकर अब तक कोई व्यक्ति चुनाव में विजयी नहीं हुआ है।
३. लोकसभा और राज्यसभा में सभी सदस्यों को अपने-अपने राज्यों भाषाओं में पूर्व सूचना देकर बोलने की सुविधा उपलब्ध है। ४. संसद में सदस्य अपने मतदाताओं की
भाषाओं में बोलते हैं, तो सदन की टी.वी. स्क्रीन पर मतदाता सीधे-सीधे जान सकते हैं कि उनका प्रतिनिधि क्या बोल रहा है ?
विदेशी भाषा अंग्रेज़ी भाषा में बोलने से मतदाताओं को मालुम ही नहीं पड़ता है कि उनका चुना हुआ प्रतिनिधि ने क्या बोला है ? अंग्रेज़ी भाषा को पूरे देश में अच्छी तरह से मुश्किल से दो या तीन प्रतिशत लोग ही जानते हैं।
५. जो भी दर्शक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण देखते हैं, उन्हें मालुम है कि सदन में आधे सदस्य अंग्रेज़ी भाषा में बोलते हैं। वे सदन में मतदाताओं के सुख-दु:ख को मतदाताओं की भाषा में नहीं बोलते हैं।
६.सत्रहवीं में चुनकर पहुँचने वाले सभी ५४३ सदस्य लोकसभा में अपने-अपने मतदाताओं की भाषाओं को सम्मान देते हुए, उनकी भाषाओं में ही बोलेंगे, तो भारत की लोकसभा या लोकतंत्र सीधा-सीधा मतदाताओं से जुड़ जाएगा। संसद जनता का सच्चा दर्पण बन जाएगी।
अत: स्वतंत्र भारत के लोकतंत्र की मज़बूती के हित में लोकसभा के इस चुनाव में सभी राजनैतिक दलों के सभी उम्मीदवार खुले रूप में अपनी प्रचार सामग्री में घोषित करें कि वे विजयी होने पर लोकसभा में सिर्फ अपने मतदाताओं की भाषाओं में ही बोलेंगे। जनता को सभी सूचनाएँ, व सुविधाएँ कानूनन जनता की भाषा में ( देश और राज्य की भाषा में) ही देंगे।ऐसी ही घोषणा का वचन सभी राजनैतिक दल भी दें।

सभी सजग और सतर्क मतदाताओं से अनुरोध है कि लोकतंत्र के इस महान यज्ञ में अपनी आहुति के रूप में इस विचार को देश के हर क्षेत्र में हर स्तर पर फेशबुक/ट्विटर आदि पर प्रसारित/ प्रचारित कर दें।इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में सहयोग करें।
भारत, भारतीय भाषाओं व भारतीयता के लिए मंथन का आह्वान।
#निर्मलकुमार पाटोदी, इंदौर।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।