महिला 

rajkumari raykvar
आज  मैं  महिला  दिवस  पर कुछ  लिखना  चाह रही हूँ ।आज  वर्तमान  में  महिलाएं  सभी  कलाओं  में  परिपूर्ण हो  रही हैं ।चाहे लडाई का, मुक्केबाजी, या पहलवानी का  हर एक मुकाम हासिल कर रही हैं ।हाल ही में मेरी काॅम नाम की महिला  ने 6 गोल्ड मेडल   मुक्केबाजी में  हासिल  किये ये  गौरव  देश के  और  अपने  नाम किया ये हम सभी  के लिए  गौरव की बात है । हमें  महिलाओं  का सम्मान  और  उन्हे  आगे बढ़ाने के लिए  प्रोत्साहन  देना,मदद  भी करना चाहिए ।मै अपने  देश की  सभी  महिलाओं को नमन करती हूँ ।कि ऐसे ही  आगे बढे  और एक अच्छे  समाज का निर्माण  करें ।नारी  अब नारी नहीं  बल्कि  वो कदम से कदम मिलाकर चलने की  सौगात  देना  चाहती है ,दे भी रही हैं ।संघर्ष भी कर रहीं हैं  साथ में  परिवार  की देखभाल, नौकरी पेशा और देश  की आन बान शान  बनाये रखने  में  कमी नहीं  रखती  वो एक मां  ,बहन,बेटी और देश  समाज  के लिए  जीना  बेहतर  समझतीं हैं ।मैं  महिला दिवस पर उन सभी  महिलाओं को नमन करती हूँ  जिन्होने देश के गौरव के लिए  अपना समय दिया ।
   #राजकुमारी रैकवार
 परिचय 
नाम —राजकुमारी  रैकवार 
पति— श्री  ऋषिकुमार 
जन्म—- जिला दमोह का 
शिक्षा–बी, ए, जिला  अनूपपुर,
स्थायी  पता  जबलपुर(मध्यप्रदेश)

matruadmin

Next Post

नारी नहीं बेचारी

Sat Mar 9 , 2019
‘दुखिया”तू गमों की मारी,दुखियारी, बेचारी.. ये मार्मिक नामकरण????? नहीं!नहीं! अब सुलझ चुके समीकरण।। नारी नहीं बेचारी।।। न ही दुखों की मारी।। ये अबला,अब बन चुकी “सबला” पुरजोर हौसला कर रहा,लाचारी का नाश, आज की नारी ,छू रही आकाश।।। गगन हो या धरती “विवशता” अब, नारी के समक्ष, पानी है भरती।।।। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।