आने का वादा था..
बच्चों को पढ़ाना था,
माँ के आँचल की
छाँव मे कुछ वक्त बिताना था….
पिता का एकमात्र सहारा था,
तो
पत्नी और परिवार संग
जीवन बिताना था।
हर रोज बच्चों से बात करता
था,
मै जल्द वापस आऊंगा
यही कहा करता था।
कुछ सो रहे थे
कुछ गुनगुना रहे थे
कुछ माँ के हाथ के बने
खाने का स्वाद याद कर रहे थे,
बच्चों के ख्याल से
चेहरे पर मुस्कान थी,
तो कही
अपनी ही शादी की बात थी
दोस्तों को निमंत्रण था
सबको शामिल होना था।
वक्त ने करवट बदली
एक पल मे
जिन्दगी बदली
वो वीर शहीद हो गए
मातृभूमि मे सब सो गए
जोर का धमाका था….
अगले ही पल सन्नाटा था।
खून की होली थी,
वो जाबाजों की टोली थी।
बिखर गए परिवार
हर तरफ था हाहाकार…..
नाम – चारु शिखा
शिक्षा – बी. ए. (लखनऊ विश्व विद्यालय )
प्रकाशन – अमर उजाला कॉम्पेक्ट ,डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट (लखनऊ )
-सुबह सवेरे डेली न्यूज़ पेपर (भोपाल ) एवं पत्रिकाओं में कविता,
-लघु कथा एवं लेखों का समय -समय पर प्रकाशन |
पुस्तक – लघु कथा एवं काव्य संग्रह सम्मान – वुमन आवाज सम्मान एवं काव्य संपर्क सम्मान (जयपुर ,राजस्थान )पता – उन्नाव, उत्तर प्रदेश
Fri Mar 1 , 2019
चिड़ीमार मत काँव काँव कर, काले काग रिवाजों के। वरना हत्थे चढ़ जाएगा, मेरे उड़ते बाज़ों के। बुज़दिल दहशतगर्दो सुनलो, देख थपेड़ा ऐसा भी। और धमाके क्या झेलोगे, मेरे यान मिराजों के। तू जलता पागल उन्मादी, देख भारती साजों से। देख हमारे बढ़े कदम को, उन्नत सारे काजो से। समझ […]