आज के युवा

niraj tyagi
रवि एक बहुत ही समझदार व्यक्ति है और 40 वर्ष की उम्र के इस पड़ाव पर काफी परिपक्व भी नजर आता है।एक बहुत ही व्यस्त सड़क पर अपनी धुन में रवि अपनी मंजिल की तरफ बढ़ा जा रहा था हमेशा की तरह उसकी कार की स्पीड वही 60-70 के बीच में थी अचानक एक बाइक पर दो बच्चे लगभग 15-16 साल के थे बड़ी तेजी से अपनी मोटरसाइकिल पर सड़क पार करते हुए उसके सामने से गुजरे और उसने जैसे तैसे ब्रेक मारकर बच्चो को बचाया।क्योंकि उसकी गाड़ी की स्पीड कम थी तब भी बड़ी मुश्किल से कंट्रोल करते हुए बच्चों को जैसे-तैसे अपनी कार से टकराने से बचाया।
अचानक सामने आए बच्चों को डांटने के मकसद से उसने बच्चो को दूर से ही थप्पड़ दिखाया। इसके बाद वह अपनी मंजिल की तरफ बढ़ने लगा।अचानक उसने देखा कि वह दोनों बच्चे जो मोटरसाइकिल पर उसके सामने से गुजरे थे उसका पीछा कर रहे हैं ज्यादा गुस्से में ना आकर समझदारी दिखाते हुए उसने अपनी गाड़ी एक किनारे लगाई और दोनों बच्चो को पास आने दिया।
वह दोनों बच्चे लगभग 15 से 16 साल के थे लेकिन वो बच्चे बाइक तेजी से पीछा करने की वजह से चोट ना खा ले, उन्हें समझाने के मकसद से अपनी कार एक किनारे पर लगा ली।अचानक दोनों बच्चे कुछ गुस्से से रवि की और आये और उन्होंने बोला चाचा थप्पड़ क्यों दिखा रहे थे।
रवि ने अपनी समझदारी दिखाते बच्चो को एक बड़ा ही खूबसूरत जवाब दिया कि दोनों बच्चे हँसते हुए वहां से चले गए। रवि ने कहाँ कि थप्पड़ इसलिए दिखाया था कि कहीं मेरा बड़े भाई समान तुम्हारे पिता बच्चो के तेज बाइक चलाने की वजह से बेऔलाद ना हो जाये और दोनों लड़के हंसते हुए अपने घर की तरफ चुपचाप चले गए यहां पर दो बच्चों का शरारती मन को रवि की समझदारी ने शांत कर दिया जो मामला एक लड़ाई का रूप ले सकता था वह शांति से खत्म हो गया।
जो माँ बाप अपने इतने छोटे बच्चो को बाइक इस स्कूटी चलाने के लिए देते है।कृपया सड़क पर वो किस गति से उन्हें चलाते है ध्यान दे। मेरा उनसे निवेदन है कि वो समय समय पर उन्हें इस तरीके से वाहन चलाने से रोके और आवश्यक ना हो तो उन्हें छोटी उम्र में ही ऐसे वाहन देने से बचे।
#नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद(उत्तरप्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।