दुनियां इतनी बेगानी क्यों है
नफरत की कहानी क्यो है
बहारें जाने कहां खो गई
राहें इतनी वीरानी क्यों है
खून से सने आ रहे अखबार
बातें प्यार की पुरानी क्यों है
दिल की तड़प कम होती नहीं
आँखों मे इतना पानी क्यों है
मरहम भी अब मिलता नहीं है
जख्मों की निशानी क्यों है
देख लो मिटाने पे तूल गए
अपनो की ही मेहरबानी क्यों है
उजड़ गए गुलशन भी “सागर”
सोचता हूँ इतनी मनमानी क्यों है
#किशोर छिपेश्वर ‘सागर’
परिचय : किशोर छिपेश्वर ‘सागर’ का वर्तमान निवास मध्यप्रदेश के बालाघाट में वार्ड क्र.२ भटेरा चौकी (सेंट मेरी स्कूल के पीछे)के पास है। आपकी जन्मतिथि १९ जुलाई १९७८ तथा जन्म स्थान-ग्राम डोंगरमाली पोस्ट भेंडारा तह.वारासिवनी (बालाघाट,म.प्र.) है। शिक्षा-एम.ए.(समाजशास्त्र) तक ली है। सम्प्रति भारतीय स्टेट बैंक से है। लेखन में गीत,गजल,कविता,व्यंग्य और पैरोडी रचते हैं तो गायन में भी रुचि है।कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होती हैं। आपको शीर्षक समिति ने सर्वश्रेठ रचनाकार का सम्मान दिया है। साहित्यिक गतिविधि के अन्तर्गत काव्यगोष्ठी और छोटे मंचों पर काव्य पाठ करते हैं। समाज व देश हित में कार्य करना,सामाजिक उत्थान,देश का विकास,रचनात्मक कार्यों से कुरीतियों को मिटाना,राष्ट्रीयता-भाईचारे की भावना को बढ़ाना ही आपका उद्देश्य है।
Wed Jan 30 , 2019
विधाता ने क्या बनाया है , अपनों को ही अपने खेल से नचाया है / कितनी विचित्र सी बात है लगाती है , मनुष्य को धोखा, मनुष्य नही देता है / बल्कि वो उम्मीदे, धोखा दे जाती है , जो वों दुसरो से हमेशा रखता है // ये जिंदगी तमन्नाओ […]