धरणी नववर्ष

aalok pandey
क्रुर संस्कृति, निकृष्ट परंपरा का
यह अपकर्ष हमें अंगीकार नहीं,
धुंध भरे इस राहों में
यह नववर्ष कभी स्वीकार नहीं ।
अभी ठंड है सर्वत्र कुहासा , अलसाई अंगड़ाई है,
ठीठुरी हुई धरा – नील-गगन, कैसी सुंदरता ठिठुराई है।
बाग बगीचों में नहीं नवीनता, नहीं नूतन पल्लवों का उत्कर्ष ;
विहगों का झुंड सहमी – दुबकी ,अन्य वन्यजीवों में भी नहीं हर्ष ।
हिमाच्छादित चादरों से ढकी धरा ,
कुहासा कैसी फैल हर-ओर रही,
खेत-खलिहानों में फैली नीरसता;
सूनी प्रकृति झकझोर रही ।
मत भूलो अपनी मर्यादा, संस्कृति संस्कारों का आवरण,
चीर प्रतिष्ठित , प्राची-चीर महान ;
दृढ-सत्य- विशुद्ध आचरण !
घायल धरणी की पीड़ा को
क्या समझ सके भारतवासी ?
जिनके षड्यंत्रों से घिरा राष्ट्र ,
आज अधिक व्यथित खंडित त्रासी !
‘अरि’ की यादों में निज दर्द भूल ,
खो स्वाभिमान मुस्काते हैं ,
देश-भक्ति का कैसा ज्वर चढ़ा- रचा ,
यह कलुषित नव वर्ष मनाते हैं।
यह देख मुझे आवे हांसी
क्या भूल गए भारतवासी ?
उस दिन ! थी जब छाई उदासी
प्रताड़ित शोषित असंख्य जन-जन सन्यासी।
छोड़ो ! रुक जाओ ! तिमिर भगे ,
प्रकृति हो जाए विशुद्ध स्वरूप ;
फाल्गुन का निखरे रुप सुघर ,
तब मने उत्सव मंगलस्वरुप!
प्रकृति जब उल्लसित होगी, भास्वर जब होंगे दिनमान,
शुद्ध -विशुद्ध ,धवल चांदनी सर्वत्र फैलाये नवल विहान,
ज्ञानी -ध्यानी ,यति व्रति जनों से- ले जीवों में भी फैले मुस्कान;
शस्य श्यामला धरती माता, फैला दे मनोहारी मंगल गान !
तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि सादर नववर्ष मना लेना ;
आर्यावर्त की विघटित धरणी पर, मंगल हर्ष मना लेना!
मंगल हर्ष मना लेना ,अपना नववर्ष मना लेना !

#आलोक पाण्डेय
( वाराणसी )

matruadmin

Next Post

कागज के नाव और बचपन

Sat Jan 5 , 2019
आज दफ्तर से निकलने में देर हो गई बरसात का मौसम था। हल्की बूँदा-बांदी हो रही थी। आकाश में बादल उमड़ रहे थे, मानो जोड़ की बारिस आने वाली हो।हल्की हल्की हवा और सून-सान पगडंडियों से चलता हुआ मैं घर की तरफ बढ़ रहा था कि अचानक मेरी नजर खेल […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।