श्री राम जन्म भूमि मुद्दे पर विहिप कार्याध्यक्ष एडवोकेट श्री आलोक कुमार का प्रेस वक्तव्य :

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नई दिल्ली |

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मामले में अपील की सुनवाई सम्बन्धित पीठ द्वारा आगामी 10 जनवरी को सुने जाने के लिए टाल दी गई है. अच्छा होता कि सम्बंधित पीठ का गठन सुनवाई की पिछली तारीख, यानि 29 अक्टूबर, से पहले ही कर दिया जाता.

देखना यह है कि नई पीठ मामले पर क्या रुख अपनाती है, विशेषकर दिन-प्रतिदिन सुनवाई तथा अपीलों के शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण के विषय में किए गए आग्रह के सम्बन्ध में.   

हमारा यह स्पष्ट मत है कि संसदीय कानून के द्वारा इस मामले का शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण हो सकेगा तथा हमारी केंद्र सरकार से मांग है कि वह अपने इसी कार्यकाल में यह कानून बनाए.  

 

एडवोकेट आलोक कुमार

कार्याध्यक्ष

विश्व हिन्दू परिषद्

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।