मिटाकर के हथेली से पुनः तेरा नाम लिखता हूँ

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rishabh radhe

तुम्हारी याद जो आई तो मैं पैगाम लिखता हूँ
मिटाकर के हथेली से पुनः तेरा नाम लिखता हूँ
सदा खोया रहा तुम में चैन से सो नही पाया
जो आई याद तेरी तो सनम मैं रो नहीं पाया
वजह बस एक ही तो थी तुम्हारी आबरू की जाँ
तभी तेरे नाम के आगे सदा गुमनाम लिखता हूँ
मिटाकर के हथेली से पुनः तेरा नाम लिखता हूँ
सलामत तुम रहो साथी दुआये रोज देता हूँ
अकेले में तुम्हें प्यारी सदाये रोज देता हूँ
भले तुम न लिखो मुझको ओ बालेकुम मेरी जाना
मगर खत में तुम्हे मैं तो सदा सलाम लिखता हूँ
मिटाकर के हथेली से पुनः तेरा नाम लिखता हूँ
मेरे कुछ दोस्त कहते है बताओ रिश्ता क्या तेरा
कोई रिश्ता भी है उससे या है पल भर का इक डेरा
तभी देने निशानी मैं मोहबत की सनम सुनलो
तुम्हारे नाम के पीछे मैं अपना नाम लिखता हूँ
मिटाकर के हथेली से पुनः तेरा नाम लिखता हूँ
मुझे चाहत में तेरी तो यहाँ नाकाम होना है
भरी महफ़िल जो झलके वही इक जाम होना है
तभी तो आज मैं खुलकर यहाँ एलान करता हूँ
तेरे आने से ही आयेगा जाँ आराम लिखता हूँ
मिटाकर के हथेली से पुनः तेरा नाम लिखता हूँ
#ऋषभ तोमर(राधे)

परिचय : ऋषभ तोमर(राधे) मध्यप्रदेश के शहर अम्बाह (जिला मुरैना) में रहते हैंl इनकी आयु २० वर्ष है,और लिखने का शौक रखते हैंl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।