दिल में खार चुभा हो तो ग़ज़ल होती है
अलफ़ाज़ में लहू मिले तो ग़ज़ल होती है
दिल ऐ जज़्बात तो हर शख्स कह लेता है
उसमें भी कोयी बात हो तो ग़ज़ल होती है
सफ़र तो सभी करते हैं जिन्दगी का यार
जो मंज़िल की ख़बर हो तो ग़ज़ल होती है
हर ख़्वाब पूरा नहीं होता एक रात में
ख़्वाब अधूरा ही रहे तो ग़ज़ल होती है
हर ज़ख्म का शफा है जहाँ में ऐ ‘राज’
ज़ख्म जब नासूर बने तो ग़ज़ल होती है
#अजीत ‘राज’
परिचय : अजीत राज
पता — बीकानेर, राजस्थान
सम्मान —-
नगर निगम द्वारा साहित्य सम्मान
नगर निगम द्वारा रंग सम्मान
बीकानेर थियेटर एसोसिएशन द्वारा रंग सम्मान
स्थानीय संस्थाओं द्वारा सम्मान
उत्तर भारतीय हिन्दी साहित्य परिषद, देहरादून द्वारा साहित्य रत्न सम्मान
अमृतधारा ऑर्गेनाइजेशन, जलगाँव द्वारा अमृतादित्य साहित्य सम्मान
Mon Dec 3 , 2018
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