वक़्त

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वक़्त बिताया करो सपनों के आस-पास

सपनें सजाओ खुली आँखों के आस-पास

तुम्हें ज़िंदगी का मक़सद समझना पड़ेगा

ज़माने में जो आए हो अदब के आस-पास

चलकर देख कौन पथ से विचलित होता है

चिड़िया भी जीती है उड़ान के आस-पास

समझ न पाते हम अपना निशाना कहां पर है

ज़िंदगी रह जाती है चूक के आस-पास

जिस मासूमियत ने मुझे बादल बना दिया

ज़ुल्फ़ें लहराते नहीं घटाओं के आस-पास

क्या होगा सजदे में ख़ुद को गुज़ार देने से

हमने रहा नहीं कभी आँसुओं के आस-पास

जीते तो बहुत से जीव हैं मेरे ज़माने में

तुम ही सिर्फ़ जा सकते खुदा के आस-पास

मत चाहो हरियाली कहीं बोने के बग़ैर भी

ख़ून-पसीना बहाना होता है खेतों के आस-पास

इतना तो समझ ले ज़िंदगी सँवर जाएगी

बच्चे बिखर सकते नहीं बुजुर्गों के आस-पास

बड़ी मशक़्क़त से मिलती है मंज़िल ‘राजीव’

बैठे मत रहना हाथ की लकीर के आस-पास

#राजीव कुमार दास

हज़ारीबाग़ झारखंड

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।