पुस्तक विमोचन कार्यक्रम सम्पन्न 

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पंचकुला (हरियाणा) |
बोहल शोध मंजूषा के सम्पादक व गुगनराम एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष एडवोकेट नरेश कुमार सिहाग जी द्वारा लिखित पुस्तक ‘राधे मोहन राय की साहित्य साधना’ का भव्य विमोचन पंचकुला में प्रो.राधे मोहन राय जी, पंजाब के पूर्व राज्यपाल ले. जरनल श्री बी. के. एस. छिब्बर, पूर्व जज श्री प्रीतम पाल, हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष श्री वीरेन्द्र चौहान एवं बी. डी. कालिया हमदम के करकमलों से किया गया |
‘राधे मोहन राय की साहित्य साधना’ नामक यह पुस्तक श्री डॉ. नरेश सिहाग जी की नवमी कृति है | डॉ. सिहाग एक प्रतिष्ठित लेखक तो हैं ही, साथ ही साथ एक सच्चे समाज सेवक भी हैं | सामाजिक क्रिया-कलापों में सिहाग जी हमेशा बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और निस्वार्थभाव से अपनी सेवाएं देते रहते हैं | डॉ. सिहाग जी अपनी संस्था गुगनराम एजुकेशनल सोसाइटी के माध्यम से शिक्षा के प्रति समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं | जिनमें शिक्षा प्रेमियों को विशेष लाभ प्राप्त होता है | श्री नरेश सिहाग जी ने अपने प्रेरणा स्रोत प्रो. राधे मोहन राय जी के जीवन और उनके लेखन पर पुस्तक लिखकर और उसका प्रकाशन कराकर शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही सराहनीय कार्य किया है |
#मुकेश कुमार ऋषि वर्मा 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।