मैं आल्हादिनी (एक दृष्टिपात )

0 0
Read Time3 Minute, 34 Second
IMG-20180830-WA0005
पिंकी परूथी “अनामिका”एक ऐसा नाम, जो जितना सौम्य व्यक्तित्व है , उतना ही सहज और ज़हीन भी ।
समर्पित भी और सहयोगी भी ।
अंतरा शब्द शक्ति प्रकाशन से प्रकाशित ,
उनकी नई कविता की पुस्तक “मैं आल्हादिनी ” पढ़कर मन प्रमुदित है । बेहद कम समय में भावों का प्रस्फुटन, संगुम्फन और प्रकटीकरण आश्वस्त करता है एवम् एक
उम्मीद भी जगाता है।
इस छोटी सी पुस्तक में उनकी 12 विविध रंगी कविताएँ संग्रहीत है ।
मैं आल्हादिनी :-संग्रह की पहली कविता है ।
जो प्रीत के रँगों से रँगी एक समर्पण की कविता है ।
प्रेम में डूबी कवियत्री की अनुभूति इतनी तीक्ष्ण और गहन है,
जहाँ शरीर से आत्मा तक प्रिय की सुंगध बिखरी है ।
जिस पर कोई दूसरा रंग चढ़ ही नहीं सकता ।
चेहरा :-कवियत्री की मानवीय संवेदनाओं और एहसासों को आत्मसात कर,
उनके प्रभाव का चेहरे पर उभर आने का कथ्य है ।
जिसे प्रिय सहज ही पढ़ लेता है ।
और इसी को पढ़ लेने में कवियत्री खुश है । क्योंकि मानवीय मूल्य इन दिनों, कमजोरियों में शुमार होने लगे हैं ।
गीत ख़ुशी के :-सम्बन्धों की उष्णता बनाये रखने की मौलिक आवश्कयता एक दूजे को समय देना, संवाद और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सुन्दर सृजन है ।
खुशबू :-सुन्दर सृजन है ।
खुशबूकी तासीर का सांगोपांग विवेचन,
अपने होने का ऐलान स्वयम् ही कर देती हैं खुशबुएँ उन्हें बाहरी उपकरणों की दरक़ार नही होती ।
फासले:-चल पड़ने और मंजिल को पा लेने के,
आकर्षण के सिद्धांत पर आधारित सृजन
पानी बिन:- पानी की महत्ता का प्रतिपादन है ।
इंसानी मन की शुष्क ज़मीं,प्रेम के पानी की प्यासी है ।
शून्य:- यत्पिण्डे तत्ब्रह्माण्डे की अवधारणा पर एक शून्य का महाशून्य में समाकर तिरोहित हो जाने का आख्यान है ।
मेरी रचना मेरी कविता:- सृजन की अनुभूतियों और अनिवार्यताओं के दरमियाँ परवान चढ़ती रचना प्रक्रिया का आख्यान है ।
क़िस्मत की लकीरें :- एक असीम लड़ाई लड़ता मन, कितनी गहरी बात पर जाकर थमता है ।
बानगी देखें:- बाहर की दौड़ से परे,
अंदर की ख़ामोशी बेहतर है ।
खोखले जज़्बात:-रिश्तों की बेहतरी के लिए उपयुक्त जमीं तलाशती और राह सुझाती रचना है ।
इम्तिहान:-नारी अस्मिता और नारी के औचित्य पर प्रश्नचिन्ह लगाती ज़िंदगी के बरअक्स, खुद की जिजीविषा के प्राबल्य का आख्यान है ।
हार न मानना अंतिम सच है ।
अंतिम रचना राज एक अच्छी  रचना है। माँ की सीख एक खूबसूरत जीवन जीने की राह सुझाती है ।
कुल मिलाकर संग्रह सहेजने योग्य है ।
हार्दिक शुभकामनाएँ ।
#ब्रजेश शर्मा विफल 
झाँसी

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

नयन तिथि-१९/०९/२०१८

Thu Sep 20 , 2018
भरे नयन बरसता स्नेह ढ़ले जीवन।१ बहती धार ये नयन बेचैन उदासी ढूँढे।२ जिंदे नयन रखकर छवियाँ जीवन भर।३ खुशियाँ ढेर नयन देखकर रोती दिखती।४ गहरी बातें रखकर नयन ये मचलती ।५ प्रतियोगिता इत्तर प्रेम गहरा नयन रखकर बढ़ता रहे।१ राहें ताकती तरसते रहते नयन धरे।२ #नवीन कुमार भट्ट परिचय […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।