sandhya
chaturvedi
प्रथम पूजनीय गौरी नन्दनं गणेश।
मम मनोकामना पूर्ण करो।
आस लगा हम आये तुम्हारे द्वार।
श्रद्धा सुमन ले कर निज हाथ।
विनती आप ही सुनोगे
ये मन मे है पूरी आस।
दुःख मेरे दूर करोगे।
मन मे पूरा विश्वास।
भूल हुई जो जाने या अनजाने में
उसे अब करो दिल से हमे माफ्।
लगा ह्रदय से अब
रखो भक्त का मान।।
हूँ मैं एक बालक नादान।।
✍संध्या चतुर्वेदी
मथुरा उप

