ममता का अंजाम

sushama malik

ममता शब्द का अर्थ सुना था, अब तक तो हम सबने प्यार।
क्या पता था ये ममता ही, प्यार पर अपनी जान देगी वार।।
:- जन्म दिया था एक माँ ने, एक माँ ने गोद खिलाया.
दो माँ दो बाप हुए कितना अच्छा नसीब था पाया..
पाल पोषकर बड़ा किया, जवानी ने अपना रंग दिखाया..
नाबालिग थी और अंतरजातीय प्रेम विवाह इसने रचाया…
माँ-बाप का सर झुका था, हुई थी इज्जत तार-तार।
ममता शब्द का अर्थ सुना था, अब तक तो हम सबने प्यार।।
पति ससुर को हुई जेल, अब तो बस ये शोर हुआ…
नारी निकेतन में रहना पड़ा, जिंदगी का ना भोर हुआ..
माँ-बाप ने उसे त्याग दिया, भाई भी मुंहजोर हुआ..
प्यार करने वाला इस जहां में, अब तो बस एक चोर हुआ..
खून के प्यासे हुए सब अपने, कर रहे थे उसका इंतजार।
ममता शब्द का अर्थ सुना था, अब तक तो हम सबने प्यार।।
दो आंगन में खेली फिर भी, ठौर मिली ना लाश को..
गोद खिलाने वालो ने छीना, उस मासूम की सांस को..
प्रियतम का ना कन्धा मिला, पुकारे वो किस आश को..
कहाँ बेटियां सुरक्षित हैं, “मलिक”देख ऐसे नाश को..
प्रेम की ना ऐसे बलि चढ़ाओ, जिंदगी का है यही सार।
ममता शब्द का अर्थ सुना था, अब तक तो हम सबने प्यार।।

#सुषमा मलिक
परिचय : सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१ तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास रोहतक में ही शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित सुषमा मलिक अपने कार्यक्षेत्र में विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल भी हैं। सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। विविध अखबार और पत्रिकाओ में आपकी लेखनी आती रहती है। उत्तर प्रदेश की साहित्यिक संस्था ने सम्मान दिया है। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।

matruadmin

Next Post

शिक्षक बिहार

Mon Aug 13 , 2018
जिसे न पढ़ना आता है, न पढ़ाना आता है, वही शिक्षक बिहार का कहलाता है होता है समय विद्यालय के खुलने का वो घर पर सोया पाया जाता है सरकारी नियमों को ताक में रख मनमानी करने लगता है बिना अवकाश स्वीकृति के घर में पाया जाता है यहाँ सब […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।