राजनीति शब्द मुझे व्यक्तिगत रूप से अप्रिय है, कोई मुझसे कहे कि इसका नया नामकरण यदि किया जाय तो कौन सा नाम अच्छा रहेगा तो मेरा सुझाव रहेगा “व्यवस्थानीति”।।
क्योंकि राजनीति शब्द से राज करने की मानसिकता की बू आती है जो कहीं न कहीं शोषण करने की प्रवृत्ति को उत्पन्न करती है और व्यक्ति के भीतर सत्ता,संपत्ति, सम्मान के कृत्तिम भूख को बढ़ावा देती है।
व्यक्ति न चाहते हुए भी इस अंधी दौड़ का हिस्सा बन जाता है और कभी भी पहचान नहीं पाता है कि वह गलत मार्ग का कुपथिक बन चुका है। इसलिए हमने सदैव एक राजनेता की अपेक्षा एक व्यवस्थापक को अधिक सम्मान की नजर से देखा है। मैंने कहीं पढा है कि जैसे हमारे घर में एक रसोइया होता है जब वह खाना अच्छा नहीं बनाता है तब हम उसे डांट लगाते हैं और आगे से ध्यान रखने को बोलते हैं और अच्छा, स्वादिष्ट भजन बनाने पर उसकी प्रसंशा करते हैं उसी प्रकार एक राज्य का खाद्य मंत्री भी एक बड़े रसोइये से अधिक हैसियत का नहीं होना चाहिए। हमें क्या आवश्यकता है उसे सर पर चढ़ाने की, उसके लिए लाल बत्ती की गाड़ी के पीछे रैली निकालने की। उसकी इतनी जिम्मेदारी हो कि पूरे राज्य की राशन व्यवस्था ठीक से सुचारू रूप से चलती रहे। इसी प्रकार अन्य सभी विभागों की बात मैं यहां पर कर रहा हूँ।
जब तक हम राजनीति को व्यवस्थानीति नहीं बनाएंगे हम कितना भी हाथ पांव मार लें वास्तविक परिवर्तन बहुत दूर नजर आता रह जाएगा।
व्यक्ति की क्रांति से विश्व की क्रांति का मार्ग प्रशस्त होगा यही मूल मंत्र है। क्योंकि व्यक्ति में ही आत्मा होती है, भीड़, समाज मे नहीं।
#स्वामी विदेह देव
परिचय: स्वामी विदेह देव का साहित्यिक उपनाम-संकल्प है। आपकी जन्मतिथि-२१ फरवरी १९८९ और जन्म स्थान-ग्राम-बजीना(जिला-अल्मोड़ा,उत्तराखंड)है। वर्तमान में आप पतंजलि योगपीठ हरिद्वार(उत्तराखंड)में निवासरत हैं। उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार शहर से संबंध रखने वाले आचार्य नवीन की शिक्षा-बीए सहित पीजीडीएमए तथा दर्शन में आचार्य (पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से)है। कार्यक्षेत्र में आप विभिन्न सेवा प्रकल्पों में सेवारत हैं और वर्तमान में योग प्रचारक विभाग का दायित्व निभाने के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। २०१२ से नौकरी छोड़कर पतंजलि योगपीठ के साथ मिलकर सामाजिक,सांस्कृतिक,आध्यात्मिक क्षेत्र में अहर्निश ही सेवा कर रहे हैं। अगर लेखन की बात की जाए तो कविता, संस्मरण,काव्य-रचना,लेख,कहानी,गीत और शास्त्रीय रचना का सृजन करते हैं। प्रकाशन में उपनिषद-सन्देश( उपनिषदों की काव्यमय रचना) पतंजलि योगपीठ द्वारा प्रकाशित है। आप ब्लॉग पर भी लेखन करते हैं। आपकी खासियत यह है कि,स्वतंत्र और अत्यंत आकस्मिक लेखन करते हैं। उपलब्धि यह है कि,पूज्य स्वामी रामदेव जी द्वारा चैनल के माध्यम से कई बार लेखन की प्रशंसा पा चुके हैं। आपकी दृष्टि में लेखन का उद्देश्य-मात्र विशुद्ध अभिव्यक्ति,सम्पूर्ण रिक्त,व्यक्त होने के भाव से भर जाना,चेतना का लेखन द्वारा ईक्षण करना तथा समय के साथ अपनी चेतना के स्तर पता करते जाना है।