कहाँ तक………..

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rajiv kumar das

मत पूछो कोई रूह में समाए तो कहाँ तक

जिन्दगी के हर तार धड़काए तो कहाँ तक

मुझको लगता ही नहीं खुद में फकत मैं हूँ

अंजान दिल में घर कर जाए तो कहाँ तक

चाँद पर जाकर आसमां उतारने की ज़िद है

बेख़बर मुझको दिवाना बनाए तो कहाँ तक

ज़मीं गगन क्या है उसके तोहफ़े के लायक

खुबसूरत ताजमहल भी बनाए तो कहाँ तक

रब छीने जो चाहत के दम वापस ले आऊँगा

दिल्लगी इब्तिदा अंजाम जाए तो कहाँ तक

क़यामत का आख़िरी हसीं तराश लिया होगा

क्या बताऊँ मैं नज़रों को लुभाए तो कहाँ तक

कुदरत के इशारों को अदा में क़ैद कर ली है

जाने मुद्दत को दर-बदर नचाए तो कहाँ तक

नाम:राजीव कुमार दास

पता: हज़ारीबाग़ (झारखंड) 

सम्मान:डा.अंबेडकर फ़ेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान २०१६

गौतम बुद्धा फ़ेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान २०१७

पी.वी.एस.एंटरप्राइज सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान १४/१२/२०१७

शीर्षक साहित्य परिषद:दैनिक श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान १५/१२/२०१७

काव्योदय:सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान:०१/०१/२०१८,०२/०१/२०१८,०३/०१/२०१८३०/०१/२०१८,०८/०५/२०१८

आग़ाज़:सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान:२५/०१/२०१८

एशियाई साहित्यिक सोसाइटी सम्मान:१७/०३/२०१८,१६/०४/२०१८,१६/०५/१८

श्री राधेकृष्ण पब्लिकेशन:चित्रपाठी अलंकरण सम्मान:२३/०४/२०१८

उड़ान:सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान:११/०७/२०१८

प्रकाशन:

शब्द अभिव्यक्ति:’नई उड़ान’:वाल्यूम ०१,०२,०३में कविताएँ व अन्य रचनाएँ प्रकाशित।

नये पल्लव:०४ में तीन कविताएँ

काव्यसागर डाट काम:०९ ग़ज़ल

काव्यसागर डाट काम(यू ट्यूब):तीन कविताएँ

आकाशवाणी हज़ारीबाग़ झारखंड:०४ कविताएँ

 

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।