ग़ज़ल

 

rajiv kumar das

ताउम्र के लिए सितम मेहमान हुआ मेरा

खाली ज़मीन खाली आसमान हुआ मेरा

कुछ आरज़ू नहीं है और जग के मालिक

सब जग से छूटा मगर भगवान हुआ मेरा

ग़म नही शहंशाह के बाशिंदों की दूरी से

जिसका सब कुछ सारा जहान हुआ मेरा

उसकी अदा में अब तक राख हो गया मैं

बखश देने वाला तो नूर-ए-शान हुआ मेरा

उतारता चला हूँ मुस्कान सबके चेहरे पर

बोए फ़सल का अच्छा लगान हुआ मेरा

बाँट दो दुनिया को नहीं चाहिए अब कुछ

ज़माने से खुबसूरत हिन्दुस्तान हुआ मेरा

कभी नहीं जिया किसी का खार बन कर

ऐसे नहीं ख़ुशबू से भरा बगान हुआ मेरा

ना देख सकी तकलीफ़ों उनकी मेरी आँखें

एक चुभन से दिल बहुत परेशान हुआ मेरा

बेकाम का जिस्म और जाँ वतन को छोड़

हँसते हुए सब सरहद पर क़ुर्बान हुआ मेरा

नाम:राजीव कुमार दास

पता: हज़ारीबाग़ (झारखंड) 

सम्मान:डा.अंबेडकर फ़ेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान २०१६

गौतम बुद्धा फ़ेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान २०१७

पी.वी.एस.एंटरप्राइज सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान १४/१२/२०१७

शीर्षक साहित्य परिषद:दैनिक श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान १५/१२/२०१७

काव्योदय:सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान:०१/०१/२०१८,०२/०१/२०१८,०३/०१/२०१८३०/०१/२०१८,०८/०५/२०१८

आग़ाज़:सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान:२५/०१/२०१८

एशियाई साहित्यिक सोसाइटी सम्मान:१७/०३/२०१८,१६/०४/२०१८,१६/०५/१८

श्री राधेकृष्ण पब्लिकेशन:चित्रपाठी अलंकरण सम्मान:२३/०४/२०१८

उड़ान:सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान:११/०७/२०१८

प्रकाशन:

शब्द अभिव्यक्ति:’नई उड़ान’:वाल्यूम ०१,०२,०३में कविताएँ व अन्य रचनाएँ प्रकाशित।

नये पल्लव:०४ में तीन कविताएँ

काव्यसागर डाट काम:०९ ग़ज़ल

काव्यसागर डाट काम(यू ट्यूब):तीन कविताएँ

आकाशवाणी हज़ारीबाग़ झारखंड:०४ कविताएँ

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।