
कसक दिल की दिल में छुपाए- छुपाए।
ये भी नहीं याद कि कब मुस्कराए।।
हम जब फना हो गए उनकी खातिर।
आए भी तो देर से बहुत आए।।
था मौजूद पानी तो तुमने न मानी।
रेत में कोई कश्ती अब कैसे चलाए।।
अंधेरों से सीखा सबक जिन्दगी का।
रोशनी में ही दिखते हैं खुद के साए।।
#अमित शुक्ला
Sat Apr 22 , 2017
अंधकार को क्यों धिक्कारें, अच्छा हो एक दीप जलाएं। कर्मों की अदभुत ज्योति से, अपना जीवन पथ चमकाएं।। स्वार्थ साधना की आंधी में, सर्वत्र व्यापित है दुराचार। निर्माणों के नवीन युग में, हम चरित्र निर्माण करवाएं।। बना चुके बहुत रंगीन चित्र हम, अब अपना सुंदर चरित्र बनाएँ। हृदय में बसी […]