आदरांजलि – फ़ोटोग्राफ़ी क्षेत्र के शुरुआती दिनों में हर उभरता हुआ फ़ोटोग्राफ़र रघु राय की फ़ोटोग्राफ़ी का दीवाना हो जाता है। उनकी ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ तस्वीरों में जो नाटकीयता और गहराई होती है, वह किसी को भी मंत्रमुग्ध करने के लिए काफ़ी है। फ़ोटोग्राफ़ी जब केवल एक तकनीक थी, तब […]

● डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ सहजता, सादगी और सरलता से जीवन यापन करने वाले, साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा, संघनिष्ठा और समानुपात में राष्ट्रजागरण जैसे कार्यों से न केवल इन्दौर बल्कि समग्र मालवा और मध्यप्रदेश को गर्वित करने वाले स्वयंसेवक का नाम कृष्ण कुमार अष्ठाना है। आप भारत के प्रथम बाल साहित्य […]

एक आदर्श ‘स्वयंसेवक देवपुत्र’ की बिदाई कृष्णकुमार अष्ठाना (पुत्र स्व. श्री लक्ष्मीनारायणजी अष्ठाना) का जन्म 15 मई 1940 को आगरा जिले के ऊँटगिर ग्राम में हुआ। आपकी प्रारंभिक शिक्षा मुरैना में हुई। प्रखर प्रज्ञा के धनी श्री अष्ठाना की प्राथमिक, स्नातक शिक्षा शासकीय शिक्षण संस्थाओं में रहते हुये हुई। वहीं […]

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल‘ मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की कसरावद तहसील में एक छोटा-सा गाँव है तैली भट्यांण। वैसे तो यह गाँव नर्मदा के तट पर प्राकृतिक सौंदर्य से आह्लादित है किन्तु इस गाँव की प्रसिद्धि देश-विदेश में होने का महत्त्वपूर्ण और एकमात्र कारण हैं संत सियाराम बाबा। कोई यह नहीं जानता कि […]

जन्म शताब्दी विशेष ● डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ आज से ठीक एक शताब्दी पूर्व यानी 22 अगस्त 1924 जमानी, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में एक कायस्थ परिवार में अद्भुत व्यक्तित्व के धनी हरिशंकर परसाई जी का जन्म हुआ था। 18 वर्ष की उम्र में वन विभाग में नौकरी की, फिर खंडवा […]

जब धरती के गहन, गंभीर और रत्नगर्भा होने के प्रमाण को सत्यापित किया जाएगा और उसमें जब भी मालवा या कहें इंदौर का उल्लेख आएगा, निश्चित तौर पर यह शहर अपने सौंदर्य और ज्ञान के तेज से बख़ूबी स्वयं को साबित करेगा। हिन्दी और अन्य भाषाओं में इंदौर के पत्रकारों […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।