हमें कुछ नहीं चाहिए, बस लड़की संस्कारी चाहिए.. शादी ऐसी कर देना, दहेज कुछ न देना। बारात की खातिर, अच्छी कर देना.. अपनी बेटी को, जो चाहो दे देना.. बस समाज में मान रख लेना। चाहे दहेज कुछ न देना, जैसी हो रही है, शादी ऐसी कर देना.. चाहे दहेज […]
काव्यभाषा
काव्यभाषा
मैं हूँ प्राणी बिल्कुल सीधा-साधा, न झूठी क़समें,न झूठा वादा। मेहनतकश,आम आदमी-सा मैं, काम-से-काम,न धोखे का इरादा। हमेशा सीधेपन पर,मुझे गया ठगा, पर मालिकों से,किया न कभी दगा। जिंदगी गुज़ारी साधारण-सी, पेट मेरा भरा रहा सदा आधा। अब मुझे बनाया चुनावी हथियार, जैसे बनता है हर बार आदमी सीधा। भूख,धर्म,जातिवाद के […]
