गधे की व्यथा..

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shashank-sharma1

मैं हूँ प्राणी बिल्कुल सीधा-साधा,
न झूठी क़समें,न झूठा वादा।

मेहनतकश,आम आदमी-सा मैं,
काम-से-काम,न धोखे का इरादा।

हमेशा सीधेपन पर,मुझे गया ठगा,
पर मालिकों से,किया न कभी दगा।

जिंदगी गुज़ारी साधारण-सी,
पेट मेरा भरा रहा सदा आधा।

अब मुझे बनाया चुनावी हथियार,
जैसे बनता है हर बार आदमी सीधा।

भूख,धर्म,जातिवाद के नाम पर,
गरीबी के नाम से भी हमें ठगा।

आरक्षण,मंदिर-मस्जिद के नाम पर,
कोई वोट नहीं मांगे अच्छे काम का।

क्षुब्ध,विचलित,व्यग्र हूँ,उग्र भी,
महसूस होता है,नहीं हूँ मैं गधा।

गधा तो बना रहे हर किसी को रोज़,
तुच्छ स्वार्थों हेतु ज्यादा-से-ज्यादा।

      #शशांक दुबे

लेखक परिचय : शशांक दुबे पेशे से उप अभियंता (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना), छिंदवाड़ा ( मध्यप्रदेश) में पदस्थ हैं| साथ ही विगत वर्षों से कविता लेखन में भी सक्रिय हैं |

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।