
गधे के भी चर्चे चहुंओर होने लगे,
इसकी वफादारी से प्रेरणा लेने लगे।
समय के मोल का बोध कराते गधे,
इसकी योग्यता पर अच्छे तंज कसे।
हमारी वाणी पर थोड़ा संयम रखें,
शब्दमाला में सकारात्मकता झलके।
पहले सामने वाले की योग्यता देख लें,
चाहे इंसान हो या पशु-पक्षी या गधे।
#गोपाल कौशल
Sat Feb 25 , 2017
मैं हूँ प्राणी बिल्कुल सीधा-साधा, न झूठी क़समें,न झूठा वादा। मेहनतकश,आम आदमी-सा मैं, काम-से-काम,न धोखे का इरादा। हमेशा सीधेपन पर,मुझे गया ठगा, पर मालिकों से,किया न कभी दगा। जिंदगी गुज़ारी साधारण-सी, पेट मेरा भरा रहा सदा आधा। अब मुझे बनाया चुनावी हथियार, जैसे बनता है हर बार आदमी सीधा। भूख,धर्म,जातिवाद के […]