“मज़दूर”

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subhodh

आंसू पी जाता हूँ अपने
चट्टानों को तोड़ के
मांगू तुझसे क्या ए नादाँ
मैंही इन रंगों का
एक मात्र सृजन करता रे….

मेरा बचपन हुवा जवान
कब जरूरतों की डाली पे
फिर भी नभ पर द्रष्टि मेरी
और तूफानों के मानिंद- टकराता
नित् नित् चट्टानों से….

धुप में अपनी काया,
पल पल रोज जलाता हूँ
भूख पे अपनी प्रतिदिन ही
मुंह चिड़ाता और
भाग्य से टकराता हूँ….

मेरे पाँवों के छालें
और तन की पीड़ा
कभी मुझको नहीं सताती है
मेरे मन की व्यथा अक्सर
क्षुधा की ज्वाला हराती हैं….

मेरा भीगा तन पसीनें से
देखों दुर्गन्ध मैंकी कैसे छुपाता है
अश्रु से सदेव डूबा ये
मेरा मन देखों केसे
घर-संसार महकाता है….

आंसू पी जाता हूँ अपने
पत्थरों को तोड़ के
क्या मांगू तुझसे ए नादाँ
मैंही इन रंगों का,
एक मात्र स्रजन करता रे…..

परिचय : सुबोध कर्णिक इंदौर (मध्यप्रदेश) के निवासी हैं|इन्होंने इंदौर स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क इंदौर से समाजकार्य में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है | विगत 16 वर्ष से समाजकार्य के क्षेत्र में समाज के विभिन्न वर्गों के लिए स्वास्थ्य,शिक्षा,आजीविका एवं स्वच्छ भारत अभियान के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत हैं |आपको कविता लिखने का बेहद शौक है|

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।