खुद को भूला हूँ तुमको पाने में, हर्ज़ क्या दिल से दिल मिलाने में। मेरे दिल की कली महक उठी, तुम जो आए गरीबखाने में । मेरे महबूब लौटकर आजा, बिन तेरे कुछ नहीं जमाने में। कट रहीं बिन तुम्हारे ये घड़ियाँ तेरी यादों के आशियाने में। है सितम क्या […]
काव्यभाषा
काव्यभाषा
