सफेद साड़ी

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nisha mathur

अवसान के समय स्वरमय पहना दिया सफेद कफन,                                                                                                                                                                   संभला दी गई बंदिशों और प्रथाओं की ढेरों चाबियां।                                                                                                                                                                                    जिस सिन्दूरी रिश्ते को वो मनुहार से जीती आई थी,                                                                                                                                                                                   वही निर्जीव नसीब में लिख गया जमाने की रूसवाईयां।।

 

उसके माथे की लाली फिर धो दी समाज के ठेकेदारों ने,
आंगन में लाल चूङियां तोड़ दी वज्रकठोर रिश्ते-नातों ने।
कानून बनाया मौलिक अधिकारों पे संविधान लागू हो गए,
वैधव्य का वास्ता दे समाजी रंगों की वसीयत लूट ले गए।

 

सरहदें तय कर दी गई अब घर की देहरी,चौखट तक की,
उसकी जागीर से छीन ली गई मुस्कराहट उसके होंठों की।
स्पन्दित आँखों में नमक उतरा,गंगाजल से उसे शुद्ध कराया,
बंटवारे में ऐलान,सांसों को गिनगिनकर लेने का आया
।।

 

निरामयता समर्पण से जुड़े रिश्ते तो उसे निभाने ही होंगे,
शून्य सृष्टिसी प्रकृति संग विरक्ति नियम अपनाने होंगे

बिछोह का दंश रोज छलेगा,तपस्या ही अब जीवन होगा,
तन पे सफेद साड़ी,सूनी कलाई और खामोश मातम होगा
।।

#डॉ.निशा माथुर

परिचय : डॉ.निशा माथुर का जन्म  ६ अप्रैल १९७३ और निवास जयपुर (राजस्थान) में पावर हाउस रोड(रेलवे स्टेशन) पर हैl आपकी शिक्षा-एम.ए.(लोक प्रशासन),व्यापार प्रशासन सहित डी.लिट् हैl ६ अप्रैल को जन्मी निशा माथुर की रुचि- कविता लेखन के साथ ही गायन,नृत्य एवं चित्रकला में भी हैl सभी क्षेत्रों में आपने पुरस्कार प्राप्त किए हैंl कार्य क्षेत्र में आप स्वयं की संस्था की निदेशक हैंl साहित्यिक यात्रा देखें तो साझा कविता संग्रह-भारत की प्रतिभाशाली कवियित्रियां,प्रेम काव्य सागर और पुष्पगंधा है और एकल काव्य संग्रह-`सफर अभी लंबा है`l 
देशभर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में काव्य-लेख प्रकाशित हो चुके हैंl पोर्टल पर कविताओं का प्रकाशन सतत जारी हैl इसी तरह आकाशवाणी-जयपुर और अजमेर से कविताओं का निरंतर प्रसारण तथा जयपुर दूरदर्शन (डीडी राजस्थान) आदि से भी कविताएं प्रसारित हुई हैंl विभिन्न काव्य मंचों पर आप काव्य पाठ कर चुकी हैंl खुद का बनाया हुआ वीडियो एलबम तथा सबसे बड़ी उपलब्धि २०१३-१४ में विदेश मंत्रालय के जारी दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में जर्मनी में जाने का अवसर हैl निशा माथुर अब तक फ्रॅंकफर्ट,हॅनोवर(जर्मनी) और मास्को रशिया की यात्रा कर चुकी हैंl दिसम्बर २०१६ में डीडी राजस्थान के `धरती धोरा री` कार्यक्रम में व्यक्तिगत साक्षात्कार प्रसारित किया गया हैl आपको मिले सम्मान में जयपुर के बिरला सभागृह में रवीन्द्र मंच से सांस्कृतिक गतिविधियों में पुरस्कार,२०१५ में साहित्य सृजन सम्मान, 
हिंदी भाषा प्रचार-प्रसार समिति (भोपाल) से २०१६ में `नारी गौरव सम्मान`,`प्रेम सागर सम्मान`,माँ प्रतियोगिता में कविता के लिए प्रथम स्थान और अखिल भारतीय मुशायरा और कवि सम्मेलन( झालावाड़) में `शाने अदब खिताब` शामिल हैl विशेष रूप से काव्य संगोष्ठी के अंतर्गत `श्रृंगार गीत` प्रतियोगिता में अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध वरिष्ठ शायर पद्मश्री डॉ.गुलज़ार देहलवी से उत्कृष्ट काव्य पाठ के लिए प्रशस्ति-पत्र और उत्तरप्रदेश से मानद उपाधि के तौर पर साहित्य का वाचस्पति सम्मान (ड़ी.लिट् उपाधि) मिलना हैl आप करीब १० साहित्यिक संस्थाओं से सम्बद्ध होकर सक्रियता से लेखन में लगी हुई हैंl

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।