हैरी मेट सैजल…उम्दा प्रेम कहानी

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फिल्म समीक्षा….
शानदार प्रस्तुतिकरण और उम्दा प्रेम कहानी की प्रस्तुति यह फिल्म ‘हैरी मेट सैजल’ है। यह इम्तियाज अली के लेखन-निर्देशन में शाहरुख को मिली ब्लॉक बस्टर की सौगात है। एक साधारण कहानी को खास तरीके से इसमें इम्तियाज़ ने पेश किया है।
हरविंदरसिंह नेहरा उर्फ हैरी(शाहरुख) पंजाबी गाइड है,उनकी एक गुजराती लड़की सैजल (अनुष्का) से मुलाकात होती है। यूरोप में सैजल अपने होने वाले पति की दी हुई रिंग खो देती है,और शुरू होती है रिंग खोजने की कवायद। रिंग खोजते-खोजते कब हैरी ओर सैजल अपना अपना दिल खो देते हैं,महसूस ही नहीं होता है। प्यार ऐसा जहर है जो, भारतीय चित्रपट पर सबसे ज्यादा बिकता है। फिल्म में बाकी कलाकार केवल अपना काम करते दिखे हैं तो शाहरुख,अनुष्का से नज़र ही नहीं हटती है। कहानी में कोई नयापन नहीं है।
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चोरी चोरी, दिल है कि मानता नहीं, प्यार तो होना ही था..ऐसी बहुत सारी फिल्में मिल जाएंगी देश में। इम्तियाज का निर्देशन सटीक और खूबसूरत होता है चाहे जब वी मीट,हाइवे, लव आज कल या तमाशा फिल्म ही क्यों न हो।
कलाकारों पर बात करें तो शाहरुख भारतीय चित्रपट के उम्दा अभिनेता हैं ,यह वह साबित कर चुके हैं। शाहरुख बहुत संजीदगी से भावनात्मक दृश्य निकालते हैं जो दिल को छू जाते हैं।
अनुष्का से बेहतर चयन छाबड़ा कर ही नहीं सकते थे। अनुष्का बेहतरीन अदाकारा है। फ़िल्म में शाहरुख-अनुष्का इतने शानदार लगे हैं कि,फ़िल्म देखते वक्त दर्शक फ़िल्म से खुद को जोड़ने लगता है,यही इस फ़िल्म की सफलता की निशानी होगी।
संगीत-गाने प्रीतम के हैं जो सुनते-सुनते गुनगुनाए जा सकते हैं।
फ़िल्म ४५०० स्क्रीन्स में प्रदर्शित हुई है, साथ ही अकेली प्रदर्शित हुई है इसलिए २५ से ३० करोड़ शुरुआती की उम्मीद की जा सकती है। गुरुवार को दुबई में प्रदर्शित हुई इस फ़िल्म ने शानदार कमाई दी है।
ओवरसीज में शाहरुख का अच्छा-खासा दबदबा है,तो वहां से भी अच्छी उम्मीद ही है।
अगले हफ्ते आ रही अक्षय कुमार की ‘टॉयलेट:एक प्रेम कथा’ फिल्म पर निर्भर करेगा कि,इस फ़िल्म का व्यवसाय कितना होगा। अगर आने वाली फिल्म कमजोर साबित हुई,तो फायदा ‘हैरी-मेट सैजल’ को मिलेगा।
खैर,शाहरुख की इस साल की यह बड़ी सफलता है, ‘रईस से शाहरुख की कुर्सी हिलने लगी थी,इस फ़िल्म से शाहरूख को टेका मिलेगा।

                                                                          #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।