जय-जय भारत

0 0
Read Time2 Minute, 42 Second
amitabh priydarshi
६९ वें गणतंत्र दिवस पर, 
भारत माता को मेरा नमन 
मातृभूमि तुझको नमन,
हे मातृभूमि तुझको नमन
यशगान करते धरती-गगन।
स्वर्ग-सा संवरा हुआ यह,
प्यारा-सा अपना वतन।
 
हैं फूल इसमें भिन्न-भिन्न,
पर एक में बिंधे हुए हैं।
खुशबू मिलती एक-सी,
हम एक संग गुंथे हुए हैं।
 
मुकुट बन नभ गर्व करता,
सागर चरण को पूजता है।
कण-कण में है ओज इसके,
जो धरती-गगन में गूंजता है।
 
हो चुकी कई बार कोशिश,
इसकी हस्ती को मिटा दे।
है नहीं कोई जहां में जो,
इसका कण भर भी घटा दे।
 
वीर इसके सपूत इस पर,
खुद को न्यौछावर हैं ये करते।
बेटियों में ओज इतना,कि
पल में खुद को जौहर वो कर देंं।
 
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई,
किए दुश्मनों के भेद हैं ये।
बात हो जब देश की तो,
हर जगह समवेत है ये।
 
न कोई फिरकापरस्ती,
न कोई है भेदभाव।
एक सबकी भारत ये माता,
एक सबका है देश-गांव।
 
आंख कोई आज भी, 
हमको दिखा सकता नहीं है।
छू ले मां के आंचल को इतना,
दम कोई रखता नहीं है।
 
हम थे और हम ही रहेंगे,
संसार जब तक ये रहेगा।
जय-जय भारत जय प्रणेता,
जग का कण-कण भी कहेगाll 

#अमिताभ प्रियदर्शी 

परिचय:अमिताभ प्रियदर्शी की जन्मतिथि-५ दिसम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-खलारी(रांची) है। वर्तमान में आपका निवास रांची (झारखंड) में कांके रोड पर है। शिक्षा-एमए (भूगोल) और पत्रकारिता में स्नातक है, जबकि कार्यक्षेत्र-पत्रकारिता है। आपने कई राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक अखबारों में कार्य किया है। दो अखबार में सम्पादक भी रहे हैं। एक मासिक पत्रिका के प्रकाशन से जुड़े हुए हैं,तो  आकाशवाणी रांची से समाचार वाचन एवं उद्घोषक के रुप में भी जुड़ाव है। लेखन में आपकी विधा कविता ही है। 
सम्मान के रुप में गंगाप्रसाद कौशल पुरस्कार और कादमबिनी क्लब से पुरस्कृत हैं। ब्लाॅग पर लिखते हैं तो,विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा रेडियो से भी रचनाएं प्रकाशित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-समाज को कुछ देना है

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मेरी गुरु जिंदगी...

Wed Jan 31 , 2018
मेरी गुरु जिंदगी, उसी ने सिखाया मौन की कीमत, शब्द की सीरत उसी ने दिखाया, अंतर का भाव बाहर का भराव, उसी ने समझाया अपना कौन ? पराया कौन ? उसी ने चुने अंधेरे भी, उजाले भी और मैंने, एक आज्ञाकारी शिष्या बन मानी हर सीख। मुझे माँजा उसी ने, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।