क्या है नैतिकता ?

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devendr soni

सामान्यतः नीतिगत विचारों को,उसके सिद्धान्तों को व्यवहार में अपनाना ही नैतिकता कहलाता है। यह नीतिगत विचार और सिद्धान्त,देशकाल,समय तथा परिस्थितियों के अनुसार सबके लिए अलग-अलग हो सकते हैं। जब इनमें भिन्नता आती है तो उसे अनैतिकता का नाम दे दिया जाता है।
विचार करें तो पाते हैं-किसी के लिए भी झूठ बोलना अनैतिक है। कोई भी इससे असहमत नहीं,लेकिन एक अधिवक्ता के लिए यही झूठ,कर्म में बदलकर नैतिकता के दायरे में आ जाता है। सभी मानते हैं-चोरी करना अनैतिक है,लेकिन जब यह कर्म में बदलता है तो करने वाले की रोजी-रोटी का साधन बन जाता है। उसके लिए यह नैतिक है। स्त्री की देह(व्यापार) का उपयोग कहीं नैतिक है तो अनैतिक भी है। कहीं ५ पति होना नैतिक है,४ विवाह करना नैतिक है तो कहीं ये सब अनैतिक भी है। कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि, `नैतिकता` बहुत लचीली होती है। इसे एक सिद्धान्त या एक राय से संचालित नहीं किया जा सकता,और न ही अपनाया जा सकता है। नैतिकता के सामान्य और सर्वमान्य सिद्धान्तों को स्वीकारते हुए यदि हम उन्हें आचरण में लाते हैं,तो वे धीरे-धीरे हमारे संस्कार का रूप धारण कर लेते हैंl यहीं से फिर स्व संस्कृति का विकास होता है। यही संस्कार ईश वंदना से लेकर तमाम सामाजिक,पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन का संवाहक बनता है,जिसे हम नैतिकता और आदर्श का नाम दे देते हैं।
किसी घर में बड़ों को चरण स्पर्श किया जाता है,किसी घर में गले लगाया जाता है। दोनों ही तरीके नैतिकता के दायरे में आते हैं,पर कहीँ ये गलत हैं तो कहीं ये सही हैं। ऐसे अनेक उदहारण हैं,जो सोचने पर विवश करते हैं कि-आखिर क्या है नैतिकता ?,कैसे बचाएं इसे ?,तो मुझे एक ही उत्तर मिलता है-सर्वमान्य सिद्धान्तों और स्व आचरण को मानते हुए मर्यादा में अपना जीवन व्यतीत करें और लोकोपयोगी कार्य के सहभागी बनें। यही सबसे बड़ी नैतिकता है,जिसे हम सप्रयास बचा सकते हैं।

                                                    #देवेन्द्र सोनी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।